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राजस्थान के कुख्यात अपराधी आनंदपाल सिंह की मौत को आज 23 दिन बीत चुके है। 3 दिन पहले हुए मृतक आनंदपाल के अंतिम संस्कार के बाद भी सियासत करने वाले बाज नही आ रहे है और राजपूत समाज को भड़काने में लगे हुए है। आनंदपाल ने अपने आपराधिक जीवन में कई हत्याएं, लूट, डकैती, अपहरण के काम किए है जिनसे उप पर वांछित और कई थानों में 40 से ज्यादा मुकदमें दर्ज हुए। समाज के लिए आनंदपाल जैसे लोग माहमारी जैसे थे जो कभी भी किसी को अपना शिकार बना सकते थे। आनंदपाल में कई मर्डर किए जिनमें वह असंवेदनशीलता और मानविक प्रवृति को भी भूल जाता था। उसकी दरिंदगी को देखकर हर किसी को हैरानी होती थी। आनंदपाल ने साल 2006 में नानूराम जाट नाम के एक व्यक्ति की हत्या की थी जिसने मानवीयता की सारी हदें पार कर दी थी। उनसे नानुराम को पंखें से उल्टा लटकाया, गर्दन काटी, शव के टुकड़े किए, एसिड में डाला और ह़ड्डियों को पीस कर सड़क पर बहा दिया। इतना घिनौना कृत्य करने वाले आनंदपाल को समाज कंटक ही कहा जा सकता है। आईये आपकों भी आनंदपाल की इस दरिंदगी से रूबरू करवाते है ताकि समाज के सामने यह साबित हो सकें की आनंदपाल नाम के अपराधी के लिए समाज और मानवीय ह्रदयों में कोई स्थान नही होना चाहिए। आनंदपाल के लिए न्याय की मांग और समाज के नाम पर उपद्रव करने वालों को भी यह सबक मिले की वो इंसान नही था बल्कि इंसानी रूप में वहशी दरिंदा था।

भगवान सिंह और जगन्नाथ बुरडक के कारण नानूराम बना दुश्मन

आनंदपाल और नानूराम के बीच कोई लड़ाई नही थी। दरअसल इन दोनों की लड़ाई भी समाज और दोस्ती ने ही करवाई। आनंदपाल द्वारा नानूराम जाट की नृशंष हत्या उकसावे और समाज की प्रतिष्ठा का परिणाम बनी। सीकर जिले के गांव बैरी भजनपुरा की एक राजपूत महिला इस हत्या का कारण बनी। दरअसल, उक्त राजपूत महिला का सांवराद में ननिहाल था और शादी डीडवाना के सांगूबड़ी में हुआ था। इस महिला का मौलासर के निमोद गांव के नानूराम जाट के प्रेम प्रसंग था, नानूराम इस समय आपराधिक प्रवृति का था और अवैध शराब का धंधा करता था, महिला नानूराम के साथ भाग गई। निमोद में ही एक शादी समारोह में भगवान सिंह ने महिला पर कसे तंज ने नानूराम और भगवान सिंह को दुशमन बना दिया। कुछ दिनों बाद नानूराम ने अपने साथियों के साथ भगवानसिंह पर हमला किया और मारपीट की। इस दौरान बरछी लगने से भगवान सिंह के पिता की हत्या हो गई। नानूराम फरार हो गया। कुछ दिनों बाद अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए भगवान ने गैंगस्टर आनंदपाल से संपर्क किया और पिता की मौत का बदला लेने के लिए आग्रह किया।

बुरडक ने दिया नानूराम को आनंदपाल की हत्या का जिम्मा

कुछ दिनों बाद लाडनू स्थित जगन्नाथ बुरडक जो कि पूर्व कृषि मंत्री हरजी राम बुरडक का पुत्र था, ने एक बैठक की जिसमें नानूराम जाट भी शामिल था। इस बैठक में बुरडक ने आनंदपाल को मरवाने का जिम्मा नानूराम को दिया था। जगन्नाथ बुरडक को आनंदपाल के विधायक का चुनाव लड़ने का शक था जिससे कारण वह व्यक्तिगत दुश्मनी निकालना चाहता था। अब दो स्थितियां उत्पन्न हो गई थी, पहली यह की जगन्नाथ बूरडक और नानूराम आनंदपाल की हत्या करना चाहते थे और दूसरी आनंदपाल और भगवान नानूराम की हत्या करना चाहते थे।

नानूराम के टुकड़े कर एसिड में डाला, दांत, ह़ड्डिया पिसवा दी

सन 2004 में आनंदपाल को सूचना मिली की नानूराम जोट किशनगढ़ में है, आनंदपाल भगवान सिंह और साथियों के साथ किशनगढ़ पहुंचा और रेल्वे फाटक से नानूराम का किडनेप कर भगवान सिंह के गांव रशीदपुरा ले आए थे। रशीदपुरा में आनंदपाल और भगवान सिंह सहित पूरे परिवार ने नानूराम के साथ मारपीट की। इस बीच आनंदपाल ने नानूराम के पंखें से उल्टा लटका दिया और गर्दन को तलवार से काट दी। हत्या के बाद भगवान सिंह के दशरथ सिंह द्वारा लाए गए 35 लीटर एसिड में नानूराम के शव के कुल्हाडी से टुकड़े- टुकड़े कर डाल दिया। करीब 5 घंटों में शव पूरी तरह से सड़ चुका था जिसके बाद नानूराम के शव की हड्डियां और दांत निकालकर पिसवा दिए और शव को एक जरीकन में रखकर कुचामन की और एक सड़क पर बिखेर दिया। मामले की जानकारी मिलने पर आनंदपाल पर धारा 364, 302, 201, 149 भारतीय दंड संहिता के तहत मौलासर थाने में मामला दर्ज किया गया। आपसी और राजनैतिक द्वेषता के चलते आनंदपाल ने भगवान सिंह के साथ मिलकर नानूराम जाट की नृशंष हत्या की।

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