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राजस्थान के गाँव-गाँव में जलापूर्ति कर वहां जल प्रबंधन एवं संरक्षण का कार्य ”मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान” के माध्यम से राज्य सरकार ने किया है। अब सरकार प्रदेश की फ्लोराइड व नाइट्रेट युक्त भू-क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को शुद्ध एवं मीठा पेयजल उपलब्ध करवाने का काम कर रही है। इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार ने फण्ड मंज़ूर कर दिया है। इस परियोजना में कुल 375 मिलियन डॉलर का खर्च आने का अनुमान है। इसके लिए अभी हाल ही में एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) और केंद्रीय जलदाय विभाग के मध्य ऋण को लेकर उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन हुआ था। जिसमे यह तय हुआ कि एआईआईबी इस कार्ययोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए 375 मिलियन डॉलर का ऋण देगा।

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प्रदेश की 40 लाख आबादी तक पहुँचाया जायेगा योजना का लाभ:

सरकार की इस कार्ययोजना के द्वारा फ्लोराइड से प्रभावित क्षेत्रों में बसने वाले राज्य के 40 लाख़ निवासियों को शुद्ध एवं मीठा पानी मुहैया कराया जायेगा। इस योजना पर इसी वर्ष अगस्त माह से काम शुरू कर दिया जायेगा। योजना के संचालन पर खर्च होने वाली 375 मिलियन डॉलर की राशि का वहन केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करेंगे।

डीएफ व रिवर्स ओसमोसिस तकनीक से मीठा पानी मुहैया कराया जायेगा:

राज्य के 31 ज़िलों के फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां रिवर्स ओसमोसिस (आरओ) व डीएफ तकनीक की मदद से लोगों तक मीठा पानी पहुँचाया जायेगा। इसके लिए सरकार ने फिलहाल दो माह का कार्यक्रम तैयार किया है। प्रोजेक्ट की शॉर्ट टर्म सफलता को देख़कर इसे और अधिक विस्तारित किया जायेगा।

अभी आरओ सिस्टम द्वारा 20 पैसे की दर से पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है:

वर्तमान में राजस्थान सरकार ने प्रदेश के फ्लोराइड की अधिकता से प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में आरओ सिस्टम लगा रखा है। यहाँ लोगों को 20 पैसे प्रति लीटर की दर से शुद्ध एवं मीठा पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है। राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में स्थित इन ग्रामीण इलाकों का जनजीवन फ्लोराइड की अधिकता युक्त पानी पीने से विरूपित हो गया था। यहाँ के निवासियों के शरीर में फ्लोराइड के आवश्यकता से अधिक एकत्र हो जाने के कारण हड्डियों में बांकपन आ चुका है। राजस्थान सरकार ने समस्या की गंभीरता को समझते हुए क्षेत्रवासियों को पूरी तरह स्वस्थ जीवन देने के लिए समय पूर्व आवश्यक कदम उठाकर कार्यवाही शुरू कर दी है।

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