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दिल्ली का जेएनयू कैम्पस एक बार फिर देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। छात्र नजीब अहमद के अचानक लापता होने के बाद कुछ छात्रों ने वीसी जगदीश कुमार को 24 घंटे तक बंधक बनाए रखा। हालांकि लापता छात्र को तलाशने का काम पुलिस का है, लेकिन माहौल बिगाडऩे और चर्चा में रहने के लिए एक विचारधारा विशेष के विद्यार्थियों ने वीसी को न केवल बंधक बनाया बल्कि पीने के लिए पानी तक नहीं दिया। इसे ऐसे विद्यार्थियों की दादागिरी कहा जाएगा कि वीसी के साथ जिन शिक्षकों को बंधक बनाया गया, उनकी पत्नियों तक को करवा चौथ पर्व के दिन मिलने तक नहीं दिया। यह तो अच्छा हुआ कि 19 अक्टूबर को हिन्दुओं का करवा चौथ का पर्व था। यदि किसी दूसरे धर्म का पर्व होता और उस धर्म के शिक्षकों को बंधक बना लिया जाता तो जेएनयू में आग लग जाती। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आखिर नजीब अहमद किन परिस्थितियों में लापता हुआ था। इस संबंध में परिजनों से भी जानकारी ली जा रही है, लेकिन एक विचारधारा विशेष के विद्यार्थियों ने ऐसा माहौल बना दिया है, जिसमें जेएनयू प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू का आरोप है कि ऐसे विद्यार्थी जेएनयू में राजनीति कर रहे हैं। सवाल उठता है कि एक विचाराधारा विशेष के विद्यार्थियों ने एक स्टूडेंट के लापता होने पर जो चिंता जताई है, वैसी चिंता श्रीनगर के गैर कश्मीर छात्रों की परेशानियों पर क्यों नहीं दिखाई जाती? श्रीनगर में उच्च शिक्षा के जो भी सरकारी संस्थान हैं, उनमें गैर कश्मीरी विद्यार्थी अध्ययन नहीं कर पा रहे हैं। अलगाववादियों ने गैर कश्मीरी विद्यार्थियों को डरा-धमकाकर भगा दिया है।
ताजा मामला श्रीनगर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ  फैंशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) के विद्यार्थियों का है। अलगाववादियों की धमकी की वजह से इन विद्यार्थियों को राजस्थान के जोधपुर में आकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। क्या यह शर्मनाक और दुखद बात नहीं है?  जेएनयू में पहले भी देश विरोधी नारेबाजी हो चुकी है। खुले आम कश्मीर की आजादी के नारे लगाए गए हैं। दशहरे पर रावण के तौर पर देश के प्रधानमंत्री का पुतला जलाया गया। पहले भी यह बात सामने आई है कि जेएनयू के कुछ विद्यार्थियों के तार कश्मीर के अलगाववादियों से जुड़े हैं। अब जब अलगाववादियों के खिलाफ कार्यवाही करने को लेकर घर-घर तलाशी अभियान चल रहा है तो इधर जेएनयू में एक छात्र के लापता होने को लेकर हंगामा किया जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह सब एक सोची-समझी राजनीति के तहत हो रहा है ताकि उन लोगों के खिलाफ कार्यवाही न हो जो देश की एकता और अखंडता को तोडऩा चाहते हैं। हालांकि 20 अक्टूबर को शाम को वीसी जगदीश कुमार को मुक्त कर दिया गया, लेकिन वीसी ने यातनाओं की जो जानकारी दी है, वह अपने आप में बहुत गंभीर है। सुरक्षा बलों को आने वाले दिनों में जेएनयू के अंदर भी एक बड़ा ऑपरेशन करना पड़ेगा। यदि इस ऑपरेशन में विलंब किया गया तो हालात बेकाबू हो जाएंगे।
(एस.पी. मित्तल)

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