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यह सत्य है कि अपराधी किसी जाति या धर्म को देखकर नही बनता। अपराध करने वाला किसी भी धर्म जात और समुदाय का हो सकता है। राजस्थान के राजपूत अभी रोष में है और एक अपराधी का पक्ष ले रहे है लेकिन अपराध करने वालों को इस प्रकार समाजों से संरक्षण मिलता रहेगा तो अपराधी ही राज करेंगे। राजस्थान का खूंखार गैंगस्टर आनंदपाल सिंह आज से करीब 23 दिन पहले एक पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। 20 दिनों तक परिवार और राजपूत समाज द्वारा कई गैर मुनासिब मांगों को लेकर इस अपराधी का शव का अंतिम संस्कार नही किया। आखिर में मानवाधिकार आयोग ने शव का अंतिम संस्कार करने की चेतावनी दी और पुलिस ने परिवार की सहमति से शव का दाह संस्कार किया। आनंदपाल एक हार्डकोर अपराधी था उसकी दरिंदगी फिल्मों के खलनायको से कम नही थी। और इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि अपनी कम उम्र में ही उसने करीब 6 से ज्यादा हत्याएं कर दी थी। आनंदपाल को राजस्थान में दहशत के दूसरे नाम से जाना जाता था। आनंदपाल के बारें में राजस्थान पुलिस के तीन एडीजी ने कई अहम खुलासे किए। इस खूंखार अपराधी ने गांव सांवराद सहित कई जगहों पर अपने ठिकाने बना रखे थे जहां यह फिरोती के लिए अपहरण किए गए लोगों को रखता था और यातनाएं देता था। आनंदपाल ने अपने गांव सांवराद में करीब 15 करोड़ का एक बुलेटप्रूफ टॉर्चर हाउस बनाया हुआ था। इस टॉर्चर हाउस को देखने भर से ही आमदी की रूप कांप जाएं। आनंदपाल ने इस अभेद्य किले को मौत का घर बनाया हुआ था।

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खूंखार फिल्मी खलनायक से कम नही आनंदपाल का किला

आनंदपाल ने अपने फार्म में करीब 15 करोड़ की लागत से एक मौत का किला बनवाया हुआ था। यह दो मंजिला घर एक बेसमेंट के साथ उन खतरनाख सुविधाओं से लैस था जो एक खूंखार फिल्मी खलनायक के अनकहे राज को उगलता हो। यहां आनंदपाल के गुर्गे विश्राम करते थे और अपहरण, हत्या जैसी वारदातों को अंजाम देते थे। पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि आनंदपाल के इस मौत के घर में बने तलघर में लोगों को टॉर्चर किया जाता था। बिल्कुल घुप अंधेरा, चमगादड़ों का डेरा और एक रोशनदान। किडनैपिंग के दौरान यहां उन लोगों को लोहे के बड़े बड़े पिंजरों में रखा जाता था।

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मशीनगन की गोलियां भी नही भेद पाती उसका किला

बेसमेंट के बाद पहली मंजिल पर इस तरह कि खिड़किया और दरवाजे थे जहां से कहीं से भी आने वाले व्यक्ति पर फायरिंग कि जा सके। खिड़कियां गोल है और इस तरह से बनी हुई है कि वहां से भागने में भी आसानी होती है। इन खिड़कियों की मौटाई इतनी है कि अच्छी खासी मशीनगन की गोलियां भी इन्हे पार नही कर सकती। आनंदपाल के इस अभेद्य किले में इस तरह की सुविधाएं थी कि अगर कभी पुलिस इसे घेरती तो कई पुलिस वालों को एक ही हमले में खत्म किया जा सकता था।। पुलिस के घेरने पर आनंदपाल यहां से आसानी से फरार हो सकता था।

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एसिड में शव को गलाकर हड्डियां पीस देता था आनंदपाल

आनंदपाल की वहसियत और दरिंदगी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह हत्या करने के बाद शव को काट देता था और टुकड़े- टुकड़े कर हड्डियां पीस देता था। आनंदपाल और उसकी गैंग इस तरह से मर्डर करते थे कि किसी की भी रूह कांप जाए। आनंदपाल ने साल 2006 में नानुराम जाट की हत्या इस दरिंदगी के साथ की कि हर कोई सहम जाएगा। आनंदपाल ने पहले नानुराम को पंखे से उल्टा लटकाया फिर गर्दन काटी, आधी गर्दन काटने के बाद उसके शरीर के टुकड़-टुकड़े कर दिए। इसके बाद उसके शव को एसिड में डाल दिया। जब शरीर नष्ट हो गया तो फिर दांत और हड्डियां निकाल कर पिसवा दी और सड़कर पर बहा दिया।

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अपराधी समाज कंटक, धर्म, जाति और समाज से कोई वास्ता नही

ऐसे अपराधी समाज पर जनता के लिए कैसे लाभप्रद हो सकते है यह शायद ही कोई समझ पाएगा । एक अपराधी जो हत्याएं, लूट, अपहरण जैसे घिनौने और हिंसक कार्य करता है तो समाज द्वारा उसे सजा देने का प्रयास करना चाहिए ना कि उसकी पैरवी में उतर जाना चाहिए। समाज को चाहिए के ऐसे समाज कंटकों को अपने बीच कोई स्थान ना दें अन्यथा उनकी आने वाली नस्लें भी वैसे ही काम करेगी जो आनंदपाल जैसे लोग किया करते थे। आनंदपाल जैसे लोगों का काम आतंक फैलाना ही होता है ना कि लोगों की रक्षा कर अपना राजपूत धर्म निभाने का। आनंदपाल जैसे आतंकियों का कोई जात, धर्म, मजहब और समुदाय नही होता। ये लोग मौका परस्त होते है और इनकी हिंसक प्रवृति कभी आपके घर को भी नष्ट कर सकती है। समाज को ऐसे अपराधियों को खत्म कर अपने जिम्मेदार होने का फर्ज निभाना चाहिए।

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