जनजाति क्षेत्र बांसवाडा जिले में मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के तहत बनी जलसरचनांए जलमग्न होने से क्षेत्र में हरियाली की बहार आ रही है । मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे की अभिनव सोच व दूरगामी परिणाम से जिले के जलाशय जलमग्न हो गए वही गांव का पानी गांव में, खेत का पानी खेत में रहे की मंशा साकार हो रही है। खासतौर से जनजाति क्षेत्र बांसवाडा की पहाड़ी क्षेत्र में इस अभियान के अन्तर्गत हजारों छोटी-मोटी जल संरचनाओं का निर्माण किया गया है और पुराने जलस्रोतों की क्षमता बढ़ाई गई है। इस बार हुई मानसून पूर्व बारिश ने कहीं-कहीं इन संरचनाओं को अपनी फुहारों से मजबूती दी है वहीं कई जल संरचनाओं में पानी रुका, और जमीन में उतरा भी। इसे देख ग्रामीणजन हर्षाये हुए हैं और उन्हें पक्का भरोसा हो चला है कि अब उनके इलाकों से पानी का संकट जल्द ही विदा ले लेगा। बगायचा के पहाड़ी क्षेत्रों में व अन्य खेत्रों में विस्तृत भू-भाग में कुछ-कुछ दूरी पर छोटी-बड़ी जल संरचनाओं की श्रृंखलाओं में जहां पहाड़ों से रेंगकर आने वाला पानी एक के बाद एक जल भण्डार को भरता हुआ आगे बढ़ने भी लगा है और जमीन में समा भी रहा है। पूरे क्षेत्र में ढलानों पर हुए एमपीटी कार्यों की वजह से इनमें आरंभिक बरसात में पानी रुका और आज तक इसमें संग्रहीत है।

इस आरंभिक स्थिति को देखते हुए यह उम्मीद है कि इस बार न केवल जमीन तरबतर होगी बल्कि पहाड़ों पर भी जगह-जगह जल भण्डारों की मौजूदगी बनी रहेगी, जल संरचनाओं में पानी का संग्रहण होगा और लम्बे समय तक पानी की उपलब्धता बनी रहेगी। इससे इस असिंचित क्षेत्र के ग्रामीणों को पेयजल के साथ सिंचाई सुविधाओं का भी लाभ मिलने लगेगा। मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन के तहत जिले में प्रथम चरण में 4 हजार से अधिक हुए कार्यों ने अपना साकार रुप ले लिया है और काश्तकारों के लिए नई राह को खोल दिया है। मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन के तहत जिले के असिंचति क्षेत्र में हुए कार्य ने उनके क्षेत्र की फिजां को बदल दिया है और काश्तकारों के अपने खेतों के आस पास उपलब्ध पर्याप्त पानी ने उनकी खुशहाली के द्वार खोल दिए है। जहां कभी पानी की दिक्कत से लोग पलायन हो रहा था वे आज अपने घरों में रहकर अपने खेतों को जोतने व सिंचाई करने में जुट गए हैं। यह परिर्वतन मुख्यमंत्री जलस्वावलम्बन ने कर दिखाया है। इसके बदौलत आज असिंचित क्षेत्र भी हरियाली की चादर ओढ़ने लगा है। जिले में हो रही वर्षा ने मुख्यमंत्री जल स्वालम्बन के तहत तैयार हुए एनिकटों ने तो कमाल कर दिखया है।