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सहकारी क्षेत्र द्वारा आमजन को बेहतर सुविधाएं देने हेतु संचालित परियोजना इंटीग्रल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (आईसीडीपी) का दूसरा चरण अब राजस्थान में प्रारम्भ होने जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के पांच जिलों झालावाड़, टोंक, सवाई माधोपुर, करोली एवं अलवर में आईसीडीपी के काम शुरू होने वाले हैं। इस परियोजना के अंतर्गत इन पांचों जिलों में सहकारी संस्थाओं से जुड़े विकास कार्यों पर 200 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। इस धनराशि से सहकारी संस्थाओं को प्रोत्साहित किया जायेगा। प्रदेश में संचालित सहकारी बैंक, सहकारी ऋण प्रबंध क्षेत्रों में इस धनराशि को खर्च किया जायेगा। संबंधित जिलों में प्रारम्भ होने जा रही इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डी.पी.आर.) संस्थाओं की स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी।

आमजन को मिले भरपूर फायदा:

राजस्थान के प्रमुख शासन सहकारिता सचिव अभय कुमार ने कहा कि डी.पी.आर. बनाते वक़्त सहकारिता विभाग एवं इन परियोजनाओं में काम कर चुके अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सेवाएं भी ली जानी चाहिए ताकि परियोजना के लिए प्रायोजित राशि का बेहतर इस्तेमाल हो सके। ऐसी कोशिश रहे कि इन संस्थाओं के साथ-साथ आम लोगों को भी फायदा मिल सके। आमजन के लिए हितैषी संस्थाओं पर बजट खर्च होना चाहिए। प्रमुख शासन सचिव ने त्वरित प्रभाव से कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि तीन दिन के भीतर अच्छे कार्य करने वाली ग्राम सेवा सहकारी समितियों की पहचान कर रैंकिंग की जाये, जिससे कि बिना समय गवाएं इन समितियों का वर्गीकरण कर उनके अनुरूप एक तय योजना बनाई जा सके।

किसानों तक पहुँचाया जाये सीधा लाभ:

शासन सहकारिता सचिव अभय कुमार ने कहा कि ऐसी समितियां जो कृषि यंत्रों, उपकरण, कृषि वाहन  को संबंधित किसानों को किराए पर देकर कृषि सहायता की ओर काम कर रही हो, उनके खर्च एवं आय का ठीक-ठीक आकलन तैयार कर इन्हें सरकार से सहायता दी जानी चाहिए। प्रस्तावित बजट से इन संस्थाओं का सहयोग करना चाहिए। इस कदम से अन्य चयनित समितियां भी इस प्रकार की संभावनाएं तलाश करेगी व किसान तथा कृषिहित में काम करेगी। जिससे हमारे कृषकों को सीधा लाभ पहुंचाया जा सकेगा।

महिला सहकारी समितियों को उपलब्ध होगी सहायता:

सहकारिता क्षेत्र में प्रस्तावित इस धनराशि से इन ज़िलों की महिला सहकारी समितियों को भी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। नवाचार और सृजन कार्य के लिए महिलाओं को प्रोत्साहित किया जायेगा। कलात्मक और रचनात्मक तरीके से बहुउपयोगी उत्पादन करने वाले इन महिला सहकारी समूहों को आर्थिक सहायता देकर इस क्षेत्र को बढ़ाया जायेगा। इससे ग्रामीण महिलाओं के जीवन स्तर में तरक्की होगी।

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