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राजधानी जयपुर में की कच्ची बस्तियों के निवासियों के हित में राजस्थान सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने इनकी बस्तियों के नियमन की कटऑफ डेट 2004 से बढ़ाकर 2009 कर दी है। साथ ही इन लोगों को अब इनके स्थायी घर का स्वामित्व देने के लिए इन कच्ची बस्तियों में अब बिना सर्वे के भी पट्टे जारी करने का निर्णय सरकार ने लिया।

शहर के निम्न तबके के इन लोगों को आवासीय सुविधाएं देने के लिए इसका फैसला मंगलवार को राज्य के यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी की अध्यक्षता में सचिवालय में एंपावर्ड कमेटी की बैठक में लिया गया है। इसके तहत अब बिना सर्वे के पट्‌टे ज़ारी करने के लिए कच्ची बस्तियों में रह रहे वर्तमान कब्जाधारियों से क्लेम मांगे जाएंगे। यदि कब्जाधारी अपनी जगह पर सात साल से रह रहा है तो उसे पट्टा जारी कर दिया जायेगा। पहले यह अवधि 12 साल की थी। सरकार के इस फैंसले से अनेकों परिवार जिन्हें अपना घर गवाने का डर लगा रहता था, अब निश्चिन्त हो जायेंगे।

स्थानीय कैंप लगाकर किया जायेगा नियमन:

सरकार कच्ची बस्ती निवासियों की सुविधा को देखते हुए,  उनके लिए उसी क्षेत्र में नियमन व पट्टे ज़ारी करने की व्यवस्था करेगी। इसके लिए जेडीए को निर्देश दिए गए है कि नियमन शिविर जेडीए परिसर पर न लगाकर उन जगहों पर जाकर लगाए जाएं जहां के लिए नियमन किया जा रहा है। सरकार के इस आदेश से कच्ची बस्तियों में रहकर हर दिन दो जून के भोजन की व्यवस्था करने वाले कमज़ोर आर्थिक वर्ग को ज़रूर राहत मिलेगी। अपनी बस्ती में आयोजित कैंप में आवेदक अपने सभी कागज़ातों को लेकर त्वरित लाभ ले पाएंगे। अपनी जगह का कानूनी अधिकार लेने के लिए कब्जाधारी वोटर आईडी, आधार या बिजली के बिल पेश कर सकेंगे।

कृषि भूमि पर बसी आवासीय कॉलोनियों की नियमन अवधि बढ़ाई गई:

सरकार ने कृषि उपयोगी भूमि पर निवासित लोगों को राहत देते हुए उनकी आवासीय कॉलोनियों के नियमन की अवधि भी बढ़ाने का फैसला किया है। नियमन की मौजूदा कटऑफ डेट 17 मई 1999 है इसे बढ़ाकर 2 मई 2012 किया गया है। इससे कृषि भूमि पर सालों से रह रहे परिवारों को उनका घर मिल जायेगा। वे लोग जो पांच वर्षों से सरकारी कृषि भूमि पर बसी बस्तियों में रह रहे है, उनकी आवासीय कॉलोनी का नियमन हो जायेगा। सरकार के इन प्रयासों से ये निर्वासित परिवार अब आवासित बनने जा रहें है।

राजधानी की करीब 250 व प्रदेश की 500 से ज़्यादा कॉलोनियों का होगा नियमन:

कच्ची बस्तियों और कृषि भूमि पर बसी बस्तियों के नियमन के इस फैसले से राजधानी जयपुर की करीब 250 और प्रदेश की 500 से ज्यादा कॉलोनियां नियमन के दायरे में आ सकेगी। इससे उन सभी लोगों को आवासीय निश्चिंतता मिलेगी, जो अनेकों सालों से अपनी जगह को अपना घर मानकर बैठे है। शासन में अपनी जनता के हर वर्ग और हर तबके का ख्याल कर विकास के पथ पर आगे बढ़ना ही सच्चे मायनों में सुशासन है।

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