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कौशल विकास रोजगार की आसान सी राह है। पूरे देश में राजस्थान से ही कौशल विकास की अवधारणा का प्रसार हुआ है। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने साल 2006 में ही प्रदेश को कौशल विकास एवं आजिविका से जोड़ दिया था लेकिन मुख्यमंत्री राजे अपने सपनों को पूरा कर पाती इससे पहले राजस्थान में सत्ता परिवर्तन हो गई। साल 2013 में जब फिर में मुख्यमंत्री राजे को राजस्थान की सत्ता संभालने का मौका मिला तो उन्होने सबसे पहले राजस्थान की महिला और फिर राजस्थान के युवाओं को संभाला। मुख्यमंत्री राजे ने कौशल विकास एवं आजिविका से प्रदेश के लाखों बरोजगार और मेहनती युवाओं को रोजगार देने में सफलता प्राप्त की है। आज राजस्थान ने देश भर को कौशल विकास की सौगात दी है तथा केंद्रीय नेतृत्व ने भी राजस्थान की इस योजना को अपनाया है। राजस्थान ही ऐसा पहला राज्य है जहां कौशल विकास के लिए अलग से विश्वविद्यालय स्थापित किया गया है और प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को इस विश्वविद्यालय से जोड़ा गया है।

कौशल विकास को पाठ्यक्रमों से जोड़ना आवश्यक

राजस्थान से सभी विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में कौशल विकास विषय जोड़ा जा रहा है। विश्वविद्यालयों के स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में कौशल विकास को जोड़ा जा रहा है। यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को अपने पाठ्यक्रमों को कौशल विकास से जोड़ने के निर्देश दिए है। केंद्रीय और राज्य स्तर के विश्वविद्यालयों, डीम्ड विश्वविद्यालयों सहित सभी महाविद्यालयों में विज्ञान, वाणिज्य, कला, सामाजिक विज्ञान, चिकित्सा, तकनीकी और अन्य संकाय में स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। कई संस्थाओं में पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता को सुधारने के लिए भी यूजीसी ने निर्देश दिए है और नया पाठ्यक्रम शामिल करने के लिए कहा है।

इन बिंदुओं के तहत होगा अब विश्वविद्यालयों का पाठ्यक्रम

यूजीसी से मिली खबरों के मुताबिक सभी संकायों में औद्योगिक आवश्यकता, कौशल विकास, वैश्विक मांग, तकनीकी नवाचार जैसे बिंदुओं का समावेश करना आवश्यक है। सभी संकायों के पाठ्यक्रमों का हर तीसरे साल मुल्यांकन भी किया जाएगा। यूजीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार देश भर में केंद्रीय विश्विद्यालयों की संख्या करीब 47 है, राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों की संख्या 350 है। इसके अलावा डीम्ड विश्विद्यालयों की संख्या करीब 123 है, निजी विश्वविद्यालयों की संख्या 249 और राज्य वाल पंजीकृत महाविद्यालयों की संख्या करीब 675 हैं। इन सभी में कौशल विकास का पाठ्यक्रम जोड़ा जा रहा है।

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