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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का आज राजस्थान दौरे का दूसरा दिन है। दूसरे दिन के शुरुआत अमित शाह ने होटल शकुन में साधु-संतों से संवाद कर की। अमित शाह ने प्रदेश के लगभग सभी घर्म गुरूओं, साधु-संतों के विचार और मंतव्यों पर चर्चा की। शाह की इस बैठक में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री राजे ने सभी साधु-संतों ने आशिर्वाद लिया और संवाद शुरू किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि भारत में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भावना को विकसित करने के लिए साधु-संत समाज का साथ आवश्यक होता है। संत समाज को एक दिशा देने का कार्य करते है तथा उनके आर्दशों से समाज प्रभावित होता है ऐसे में संतों के जरिए भारतीय जनता पार्टी अपनी बात समाज तक पहुंचाने का कार्य कर रही है।

संत समाज को देता है नई दिशा, समाज पर संतों का है प्रभाव

अपने राजस्थान प्रवास के दूसरें दिन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रदेश के संत समाज से संवाद कर वर्तमान परिस्थितियों का जायजा लिया। साधु-संतों से मंथन कर शाह ने भाजपा की मजबूती और संत प्रगति के लिए विस्तार से संवाद किया। इस संवाद में राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि राजस्थान सरकार की कई योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के संत समाज को लाभ मिला है। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान में संत समाज की एक महत्ती भूमिका रही है। संतों ने भाजपा का हमेशा साथ दिया है ऐसे में सत्ता-संगठन का भी यह कर्तव्य बनता है कि संत समाज को प्रेरित करें और उत्साहित करें।

मंदिर-देवालयों की स्थिती सुधारेगी सरकार, संतों के आशिर्वाद की आवश्यकता

शाह ने कहा कि गौरक्षा के नाम पर चल रहे अनैतिक कार्यों में संतों का साथ नही होना चाहिए। संत समाज को दिशा दिखाता है और सभी वर्गों के कल्याण की भावना से कार्य करें। शाह ने कहा कि राजस्थान के सभी मंदिरों और देवालयों की स्थितियों को सुधारा जाएगा और साधु-संतों के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार विशेष कार्यक्रमों को लागू भी करेगी। उन्होने कहा कि संत समाज की भलाई में अपना जीवन लगा देता है और समाज भी संतों की देवस्वरूप पूजा करता है।

संतों ने कहा, राजा राम के समय को शाह ने दोहराया

कार्यक्रम में मौजूद संत समाज ने शाह के इस संवाद को वैचारिक बताया और कहा कि शाह ने संत समाज से वार्ता कर इतिहास दोहराया है। यह राजा राम और उनसे भी पहले का जमानें में हुआ करता था कि सत्ता पक्ष अपने सभी कार्यों में संत-साधु के मंत्रणा करते थे और संतों के आशिर्वाद से कार्य शुरू करते थे। पहले भी शासक इस प्रकार संतों को प्राथमिकता देते थे और शासकों ने संतों की सभी समस्याओं का समाधान किया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शाह ने प्रदेश के मंदिरों और देवालयों की स्थिती को सुधारने और संत समाज के लिए विशेष योजनाओं को लागू करने की बात कही।

शाह ले रहे है भाजपा मुख्यालय में बैठक

शाह ने अपने राजस्थान प्रवास के दूसरे दिन भाजपा मुख्यालय में बैठक ले रहे है । इस बैठक में मुख्यमंत्री राजे और प्रदेश प्रदेशाध्यक्ष परनामी भी मौजूद है। यह बैठक प्रदेश पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों, मोर्चा प्रदेशाध्यक्षों, प्रकल्पों के संयोजक, आयोग के अध्यक्षों से संगठन का फीडबैक ले रहे है। इस बैठक में भाजपा के सभी जिला स्तर पर बनने वाले कार्यालयों के बारें में भी विस्तार से चर्चा होगी साथ ही बूथ स्तर पर होने वाले संगठनात्मक कार्यों के बारें में भी शाह संवाद करेंगे।

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