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पूरे देश में एक टैक्स, एक मार्केट बनाने के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में किया गया सबसे बड़ा आर्थिक सुधार यानि जी.एस.टी. (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) को लागू हुए एक पखवाड़े से ज़्यादा समय बीत चुका है। 1 जुलाई 2017 से लागू की गयी इस कर प्रणाली से देशभर में मिलने वाली वस्तुओं पर सामान दर से टैक्स लग रहा है। सोने-चांदी सहित सभी आभूषण योग्य रत्नों पर लागू हुए जीएसटी ने देश में सालों से चली आ रही अनियमित कर व्यवस्था की रीत को तोड़ा है। जीएसटी के दायरे में अब नए पुराने सभी कीमती गहनों को रखा गया है। सरकार के ताज़ा स्पष्टीकरण के अनुसार पुरानी कोई ज्वैलरी या सोना-चांदी बेचने पर 3% की दर से जीएसटी लगेगा। इसके साथ ही यदि कोई पुरानी ज्वैलरी को देकर, उसके बदलें में नई ज्वैलरी लेता है, तो नई ज्वैलरी पर जो टैक्स लगेगा उसमे यह दर जुड़ जायेगी। सरकार के राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने कल बुधवार को यह जानकारी दी।

इसे ऐसे समझिये:

नयी-पुरानी ज्वैलरी पर लगने वाले जीएसटी को सही से समझने के लिए, मानिये कि किसी ज्वैलर के पास कोई सामान्य व्यक्ति बेचने के लिए पुराने गहने लेकर जाता है। इस स्थिति में जब ज्वैलर उस शख़्स से उन पुराने गहनों को खरीदता है तो रिवर्स चार्ज के तौर पर ज्वैलर 3% जीएसटी लेगा। सीधे-सीधे यूँ समझा जा सकता है कि अगर ज्वैलरी एक लाख रूपए कीमत की है, तो उसमें से 3% की दर से  3,000 रूपए कट जाएंगे। यहाँ ग्राहक यदि ज्वैलरी में कोई बदलाव करवाता है या उसमें सुधार करवाता है तो इसे जॉब वर्क माना जाएगा। ज्वैलरी पर इस रिपेयरिंग के काम के लिए जो पैसे लिए जाएंगे, उस कीमत पर 5% जीएसटी लगेगा।

6 साल तक रखना होगा अकाउंट का रिकॉर्ड:

जीएसटी के तहत व्यापारी को सरकार को टैक्स देना होगा। इस प्रणाली में व्यापार करना पहले से अधिक आसान हो जायेगा। ईमानदारी से टैक्स अदा करके काम करने पर सरकारी नज़र में कोई व्यापारी या व्यक्ति ईमानदारी की क्ष्रेणी में रहेगा। इस व्यवस्था के अंतर्गत कारोबारी को अपने टैक्स अदायगी का रिकॉर्ड कम से कम 6 साल तक रखना पड़ेगा। सरकार की जांच होने पर छह साल तक का हिसाब माँगा जा सकता है। लेकिन यदि टैक्स मामले में कोई केस चल रहा हो, तो उस केस के ख़त्म  होने तक अपने दस्तावेज़ों का रिकॉर्ड रखना होगा।

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