जर्जर महल, किलों और हवेलियों को बचाने के लिए सरकार बना रही है रणनीति, होगा पर्यटन क्षेत्रों का विकास

राजस्थान को देश भर में पर्यटन के लिहाज से समृद्ध माना जाता है। देश में आने वाले पर्यटकों की विशेष निगाहे राजस्थान पर टिकी रहती है । राजस्थान के राजसी ठाट-बाट और ऐतिहासिक धरोहरों को निहारने के लिए हर साल लाखों देश-विदेशी पर्यटकों का आना जाना लगा रहता है। मुख्यमंत्री राजे ने भी राजस्थान में पर्यटन विभाग को विशेष दर्जा दिया है। प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए विभाग की और से कई योजनाओं को संचालित किया जा रहा है।

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राजस्थान पर्यटन विभाग में चल रही है जोरों शोरों से तैयारी

मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे जर्जर ढांचों में बदलते जा रहे और जीर्ण-शीर्ण हो रहे पर्यटन महत्व के छोटे-छोटे किलों, महलों तथा हवेलियों को बचाने तथा पर्यटन की सम्भावनाओं को बढ़ाने के लिए एक विशेष नीति बनाने जा रही है। मुख्यमंत्री राजे का कहना है कि पर्यटन महत्व की मिटती धरोहर को बचाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना बना कर इसे बचाए रखने के प्रयास किए जाएंगे। साथ ही, उन्होंने प्रसिद्ध मंदिरों वाले शहरों और छोटे कस्बों में रख-रखाव और साफ-सफाई की व्यवस्था के लिए विशेष समितियां बनाने का सुझाव दिया।

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2018 मई से पहले पूरे होंगे काम

मुख्यमंत्री राजे शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पर पर्यटन, देवस्थान विभागों और धरोहर संरक्षण प्राधिकरण के विभिन्न विकास कार्यों तथा प्रदेश में पर्यटन विकास की अन्य योजनाओं की समीक्षा कर रही थीं। उन्होंने निर्देश दिए कि जिला कलक्टरों के माध्यम से हर जिले की ऐसी प्रॉपर्टीज की फोटोग्राफ और जानकारी सहित सूची तैयार की जाए जो पर्यटन महत्व की हैं, परन्तु नष्ट होने के कगार पर हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन विभाग ऑनलाइन बिडिंग के माध्यम से ऐसी प्रॉपर्टीज को नष्ट होने से बचाने के लिए निवेशकों को आगे आने का मौका दे सकेगा। बैठक में बताया गया कि राजकीय संग्रहालयों के संरक्षण के पहले चरण के सभी 10 संग्रहालयों के कार्य मई 2018 तक पूरे कर दिए जाएंगे।

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लेपर्ड और लॉयन सफारी होगी जल्द शुरू

सीकर तथा पाली के संग्रहालयों को संरक्षण कार्यों के बाद पुनः शुरू किया जा चुका है तथा सात अन्य संग्रहालयों को भी शुरू करने का काम दिसम्बर 2017 तक पूरा हो सकेगा। वहीं दूसरे चरण के आठ संग्रहालयों के संरक्षण कार्य भी सितम्बर 2018 तक पूरे हो सकेंगे। पिछले दिनों नाहरगढ़ बायलॉजिकल पार्क में तीन शावकों के जन्म के बाद वहां फरवरी 2018 तक लॉयन सफारी शुरू करने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। साथ ही, झालाना क्षेत्र में लेपर्ड प्रोजेक्ट के तहत तेंदुओं के लिए है बिटाट विकसित करने और लेपर्ड सफारी के लिए विकास कार्य 2017 के अंत तक पूरे होने पर भी चर्चा हुई।

टाइगर रिजर्व के लिए होगा बेहतर काम

मुख्यमंत्री राजे ने मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व, कोटा की भी समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि इस प्रोजेक्ट के तहत जोधपुर क्षेत्र से 130 तथा कोटा कैंटोन्मेंट से लगभग 50 चीतल एवं हरिण मुकुंदरा हिल्स क्षेत्र में छोड़े जा चुके हैं। बैठक में बताया गया कि अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क कोटा का मास्टर लेआउट प्लान सेंट्रल जू अथॉरिटी द्वारा स्वीकृत करने के बाद तारबंदी और हरित क्षेत्र विकसित करने के लिए लगभग 10 हजार पौधे लगाने का कार्य किया जा रहा है।

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