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राजस्थान सरकार ने सभी सरकारी योजनाओं का लाभ पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के प्रयास किए है। राज्य सरकार ने गांव और गरीबों को उनका हक दिया है तथा योजनाओं से हर व्यक्ति का राहत पहुंचाई है। हाल ही में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान सरकार पर खाद्य आपूर्ति को लेकर आरोप लगाए है। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार गरीबों को उनका हक देने के लिए उनके घरों पर ‘मै गरीब हूं ‘  लिखवा रही है जो की सामाजिक जीवन में किसी भी व्यक्ति की छवी को खराब करता है। अशोक गहलोत के आरोपों का खंड़न करते हुए राजस्थान सरकार के पंचायती राज व ग्रामीण विकास मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कहा है कि गरीबों के घर पर नाम लिखवाने की परंपरा तो कांग्रेस राज से चल रही है। उन्होने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत जी यह भूल चुके हैं कि गरीबों के नाम कांग्रेस सरकार के जमाने से चली आ रही है। मंत्री राठौड़ ने कहा है कि राजस्थान सरकार गरीबों को उनका हक देने के लिए, पात्र व्यक्ति को लाभ देने के लिए अगर नाम लिखवा भी रही है तो इसमें खराब क्या हैं। आज राज्य सरकार बीपीएल और गरीबों को उनका हक सम्मान के साथ दे रही है ताकि उनका हक कोई और नही ले सके। इसीलिए राजस्थान सरकार ने राशन वितरण योजना को डिजिटल कर बिचौलियों का हस्तांतरण बंद किया है। अब वो दौर नही जब रसूखदार गरीबों के हक से मोटी कमाई करते थे।

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आरोप लगाने से पहले अपने कार्यकाल में झांकें गहलोत

कांग्रेस शासन में गरीबों को उनके हक का राशन नही मिला इस बात के भी बहुत से प्रमाण है, क्योंकि व्यवस्था में पार्दशिता नही थी और गरीबों के हितों कि रक्षा करने गहलोत सरकार लापरवाह बनी रही। कांग्रेस सरकार के समय अपने हक के लिए बीपीएल परिवारों को लड़ाई करनी पड़ती थी और फिर भी सरकार के कानों में उनका आवाज नही पहुंचती थी। अशोक गहलोत जी किसी पर आरोप लगाने से पहले अपने कार्यकाल की और झांके और देखे की राशन वितरण की जो व्यवस्था उनके कार्यकाल में चलाई जा रही थी क्या वो सही थी। वर्तमान सरकार PoS मशीनों, भामाशाह कार्ड जैसी आधुनिक प्रणाली से राशन वितरण कर वंचितों को उनका हक सम्मान के साथ दे रही है।

वर्तमान सराकर दे रही है सम्मान के साथ हक

वर्तमान राजस्थान सरकार और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे गांव और गरीबों के हितों की रक्षा करने के लिए तत्पर है। गांवों में गरीबों और बीपीएल परिवारों को उनके हक का राशन देने के लिए मुख्यमंत्री राजे ने PoS मशीन, अन्नपूर्णा भंड़ार और भामाशाह योजना जैसी उपयोगी योजनाओं को संचालित कर रही है। वर्तमान में राजस्थान में करीब 6000 उचित मूल्य की दूकानों को अन्नपूर्णा भंड़ार में बदला गया है जहां ना केवल राशन मिलता है बल्कि अन्य आवश्यक उत्पादों के लिए गरीब और किसान को भटकना नही पड़ता। राजस्थान सरकार अब गरीबों को पीओएस मशीनों से राशन वितरण कर रही है। इन मशीनों को उचित मूल्य की दुकानों पर लगाया गया है जहां पात्र व्यक्ति की बायोमेट्रिक पहचान से ही राशन मिलता है। इसके अलावा राजे सरकार भामाशा योजना से पात्र परिवारों को राशन दे रही है । ऐसे में किसी बिचौलिए या फिर किसी प्रकार की अनियमित्ताएं सामने नही आती। इन योजनाओं से परिवारों को उनके हक का राशन और अन्य सामग्री मिल रही है।

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नाम लिखने की परंपरा कांग्रेस सरकार की

मंत्री राठौड़ ने कहा कि बीपीएल परिवारों के घर पर बीपीएल लिखने की यह प्रक्रिया पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत जी की सरकार ने 6 अगस्त, 2009 के आदेश से शुरू की थी और आज इस मामले को लेकर वे ही राजनीति कर रहे हैं।  उन्होंने कहा कि गहलोत जी की सरकार में उस वक्त नरेगा के तहत मजदूरी पाने वाले श्रमिकों तक के नाम व रोजगार दिवस भी वॉल पेंटिंग के रूप में गांव-गांव में लिखवाए गए थे। उन्होने बताया कि भाजपा सरकार तो भामाशाह योजना के माध्यम से बिना किसी मध्यस्थ के सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत पैसा सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचा रही है।

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