मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सोच हैं कि सरकारी सेवाएं सभी तर त्वरित और सुगम रुप से पहुंचनी चाहिए। इस सोच को मूर्त रुप देने के लिए तीन साल पहले रादज्य सरकार ने अपने ई-मित्र नेटवर्क को बढाना शुरू किया था। तब पूरे राज्य में 6 हजार ई-मित्र केंद्र ही थे। मुख्यमंत्री राजे ने प्रदेश में ई-मित्र केंद्रों की संख्या को बढाया और आज प्रदेश में 45 हजार से ज्यादा ई-मित्र केंद्र स्थापित हैं।

देश भर में संचालित ऐसे ई-मित्र सेवा केंद्रों में से लगभग 25 प्रतिशत केंद्र राजस्थान में ही हैं। यह विसतार केवल ई-मित्र केंद्रों की संख्या में नही , ई-मित्र पर मिलने वाली सेवाओं में भी तेजी से विस्तार करने के लिए किया गया हैं। जहां तीन साल पहले लगभग 50 सराकरी सेवाएं ई-मित्र केंद्रों के माध्यम से मिल रही थे लेकिन आज वसुंधरा सरकार के अनूठी पहल से ये संख्या 70 से ज्यादा विभागों की हो गई हैं। अब प्रदेश में 70 से ज्यादा विभागों की सेवाएं ई-मित्र केंद्रों से माध्यम से पहुंचाई जा रही हैं।

रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य

पहले घंटों खराब करके सरकारी कारम के लिए पंचायत या तहसील जाना पड़ता था लेकिन जब ये काम घर के पास ही हो रहे है तो समय और धन की बर्बादी क्यों करें। अब पंचायत व तहसील का सारा काम घर के पास ही आसानी से हो रहा हैं। जन्म-मृत्यु और मूल निवास प्रमाण पत्र, कॉलेज के आवेदन, परीक्षाओं की फीस, रोजगार आवेदन, बिजली कनेक्शन आदि सभी सेवाओं  की ई-मित्र फीस सरकार ने निर्धारित कर दी हैं। यह रेट लिस्ट हर ई-मित्र केंद्र पर लगाना अनिवार्य हैं।

बैंकिंग सेवाए भी उपलब्ध

नियमित सरकारी व चुंदिदा प्राइवेट सेवाओं के अलावा 15 हजार ई-मित्र केंद्रों पर माइक्रो ए.टी.एम लगे हैं और यहां बैंकिंग सेवाए भी प्रदान की जा रही हैं। गांवों के निवासी अपने जनधन व भामाशाह खातों से अपने अपने भामाशाह-रूपे कार्ड का इस्तेमाल कर रुपए निकाल रहे हैं। ई-मित्र व्यवस्था से आमजन को हुई सुविधा का अनुमान इस बात से ही लगाया जा सकता हैं कि हर महीने पूरे राज्य में 60 से 70 लाख के ट्रांजेक्शन इन्ही केंद्रों के माध्यम से हो रहे हैं। प्रदेश के कोने-कोने में खुले ये ई-मित्र हजारों संचालकों के लिए स्वरोजगार का माध्यम भी बने हैं।

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