Vasundhara Raje Rajasthan

मंगलवार को बिड़ला ऑडिटोरियम में दीनदयाल उपाध्याय स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने की। कार्यक्रम में पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं एकात्म मानव-दर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान के अध्यक्ष श्री महेश चन्द्र शर्मा द्वारा संकलित पण्डित दीनदयाल उपाध्याय सम्पूर्ण वांड्मय के 15 खण्डों के प्रकाशन का लोकार्पण किया। उस मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने समारोह को मुख्य वक्ता के रूप में सम्बोधित किया।

अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा हैं सरकार की योजनाओं का लाभ

समारोह की अध्यक्षा मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय को याद करते हुए कहा कि राज्य सरकार उनके विचारों पर अमल करते हुए समाज के अन्तिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना चाहती है। भामाशाह योजना जैसे गरीबोन्नमुखी कार्यक्रम पण्डित दीनदयाल जी के गरीब-किसान-मजदूर के उदय के सपने को साकार करने की दिशा में की गई पहल है।

राजस्थान सरकार की योजनाएं पंडितजी से प्रेरित

मुख्यमंत्री राजे ने कहा कि पण्डितजी ने एकात्म मानववाद के सिद्धान्त में देश की बहुसंख्य आबादी किसान, मजदूर और गरीब को नकारने की बात नही कही हैं। इसी विचार को प्रासंगत कर राजस्थान सरकार ने अन्नपूर्णा भण्डार और अन्त्योदय जैसी योजनाएं लागू की हैं। प्रदेश सरकार की इन योजनाओं का उद्देश्य है कि हर वंचित व्यक्ति की सरकार और समाज में भागीदारी बढ़े।

किसानों की तरक्की के लिए ग्राम-2016 का आयोजन

कार्यक्रम की अध्यक्षा मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि पण्डित दीनदयाल की शिक्षाओं पर अमल करते हुए प्रदेश सरकार ने किसानों की तरक्की सुनिश्चित करने के लिए ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट का आयोजन किया। इस आयोजन की सफलता और किसानों की मांग के चलते अब सम्भाग स्तर पर भी ऐसे आयोजन किए जाएंगे। इस अवसर पर श्रीमती राजे ने कहा कि राज्य सरकार ने निवेश और उद्योगों के प्रोत्साहन के साथ-साथ कृषि क्षेत्र के विकास के लिए भी विस्तृत कार्य योजना तैयार की है।

दीनदयाल जी का राष्ट्र-दर्शन पश्चिम के राष्ट्रवाद से अलग

स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने कहा कि पण्डित दीनदयाल जी का राष्ट्र-दर्शन पश्चिम के राष्ट्रवाद से अलग था, जो अपने समय से बहुत आगे की सोच थी और वर्तमान में प्रासंगिक हैं। उन्होने कहा कि आजादी के बाद पण्डित दीनदयाल उपाध्याय ने राजनीति को साध्य की बजाय साधन मानने के सिद्धान्त को अपनाया और राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया।

 

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