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राजस्थान की पहचान अब मिट्टी के धोरें और धूल भरे रेगिस्तान से नही रही । राजस्थान बदल रहा है और बदल रही है रेगिस्तान की पहचान। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने विजन और अपनी प्राथमिकताओं पर राजस्थान के धरती पुत्रों को रखा है जिससे राजस्थान की मिट्टी सोना उगा रही है। आज राजस्थान को देश विदेश में नई पहचान मिली है तो यहां के किसान और खेतों से । मुख्यमंत्री राजे ने राजस्थान के किसान भाईयों को उन्नत और विकसित करने के लिए ग्लोबल एग्रीटेक मीटः ग्राम जैसे विश्वस्तरीय आयोजन कर खेती की नई विद्याओं से रूबरू करवाया था साथ ही किसानों के खेती करने के अलावा खेती से जुड़ी अन्य़ जानकारियों से किसानों ने नवाचार किए है जो आज देश के किसी भी कौने में नही हो रहे है।

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राजस्थान के थार में चमका हमारा बीकानेर

आज हम आपको राजस्थान के थार यानी बीकानेर में लेकर चलते है जो रेगिस्थान को मात दे हरियाली की चादर ओढ़े शान से लहरा रहा है। बीकानेर के बज्जू का यह क्षेत्र पॉली हाउस में खीरे की फसल के लिए अपनी नई पहचान कायम कर चुका है। आपकों बता दें कि पॉली हाउस मे खेती करने के लिए करीब 35 से 40 लाख रुपए का खर्चा आता है और राजस्थान सरकार करीब 25 लाख रुपए का अनुदान देकर इसे किसानों के लिए आसान बनाती है। बज्जू क्षेत्र के फुलासर गांव के चकों में पोली हाऊस तकनीक आधारित खेती शुरू हो चुकी है। इसमें किसानों द्वारा प्रारम्भिक रूप से खीरे की फसल उगाई जा रही है।

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एक बार की फसल से 15 लाख की न्युनतम होती है आय

वर्तमान में राजस्थान के बीकानेर से बड़ी मात्रा में खीरा की खपत राजस्थान, पंजाब औऱ हरियाणा में है। इन दिनों खीरे की अधिक मांग के चलते करीब 40 से 50 रुपए प्रतिकिलों के भाव से खीरा बेचा जा रहा है। इस हिसाब से 4000 मीटर में खीरे की 500 से 600 क्विंटल फसल ली जा सकती है जो कि 120 से 150 दिन में तैयार होती है। खीरे की इस एक फसल से किसान 15 लाख से ज्यादा की आय ले सकता है।

रेगिस्तान में है बड़ा स्कोप

आने वाले दिनों में खीरे की खेती का प्रदेश में अवसर और ऑप्शन के रुप में देखा जा रहा है। राजस्थान के किसानों को प्रदेश सरकार मौके पर ही खेतों में जाकर विभिन्न तकनीकों और फसलों से संबंधित जानकारियां उपलब्ध करवा रही है जिससे किसान की उपज दिनों दिल बढ़ रही है। कृषि पर्यवेक्षकों द्वारा किसानों को उन्नत खेती के बारें में नई तकनीकों के बारे में विस्तृत रूप से बताया जा रहा है और ग्राम जैसे आयोजनों से किसानों को खेती से संबंधित समस्याओं से निजात मिलती है। आपकों बता दे कि राजस्थान में बिना पानी की भी फसलों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है जिससे लोगों को एक बार फिर खेती में आय के अवसर नजर आये है।

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किसानों की बढ़ने लगी इनकम, मिला समृद्ध आर्थिक आधार

पॉली हाउस से किसानों को बहुत मजबूती से आर्थिक लाभ होने लगा है। यही कारण है कि मात्र 6 महीने में ही एक दर्जन पॉली हाउस बनकर तैयार हो चुके हैं और 5 पॉली हॉउस में फसल तैयार खड़ी है। पॉली हाउस लगाने के लिए राज्य सरकार किसानों को 75 फीसदी अनुदान दे रही है। आज प्रदेश के किसान इस खेती को अपना रहे हैं। किसान बताते है कि जो फसल हम लोग टीवी पर देखते थे आज हमारे खेतों में उग रही है जिससे प्रोत्साहन मिलता है।

फोटा सौजन्य: NEWS18HINDI

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