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कांग्रेस के साथ 17 दलों ने हाल ही में राष्ट्रपति पद के लिए पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को अपनी उम्मीदवार बनाया है लेकिन देश के हर कौने से चुनाव हारने के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी छुट्टियां मनाने और अपनी नानी से मिलने इटली चले गए है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सहीत देश के 17 विपक्षी दलों  ने भाजपा के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के सामने मीरा कुमार को अपना प्रत्याशी बनाया है। लेकिन इस बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल जी देश से बाहर है संभवतया यही सोचकर शायद विपक्षी दलों ने मीरा कुमार को अपना प्रत्याशी बनाया है। 28 जून को यूपीए की उम्मीदवार मीरा कुमार ने राहुल गांधी की गैरमौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल किया है अब इसे क्या समझा जाए।

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  • राहुल गांधी की गैर मौजूदगी में विपक्षी दलों की प्रत्याशी मीरा कुमार का नामांकन
  • 17 राजनीतिक दलों की बैठक में राहुल की गैरमौजूदगी पर प्रश्नचिन्ह
  • भाजपा के प्रत्याशी कोविंद को हराने के लिए विपक्षी एक लेकिन राहुल नही
  • क्या राहुल को राष्ट्रपति चुनाव में शामिल नही करना चाहते सभी विपक्षी दल
  • राहुल गांधी के लिए अहम नही है क्या देश का सबसे बड़ा चुनाव
  • चुनाव में पार्टी की कमान संभालने वाले राहुल को क्या जानबूझ कर रखा गया है दूर

17 विपक्षी दलों के बीच राहुल गांधी की गैर मौजूदगी करते है हैरान

राहुल गांधी के देश में कांग्रेस के एक बड़े नेता का दर्जा प्राप्त है। अक्सर देश भर में चुनाव प्रचार और पार्टी की कमान राहुल गांधी के हाथ में ही होती है लेकिन इस समय देश में राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहे है और भाजपा के प्रत्याशी को हराने के लिए काग्रेस सहीत 17 राजनीतिक दल एक होकर अपनी प्रत्याशी के नाम की घोषणा करते है लेकिन यहां राहुल गांधी की गैर मौजूदगी थोड़ी हैरान करती है। राहुल गांधी के भारत में ना होने बावजूद भी विपक्षी उम्मीदवार मीरा कुमार नामांकन दाखिल कर देती है। हालांकि राहुल गांधी का होना या ना होना यह कांग्रेस पार्टी का अपना आंतरिक मामला है लेकिन इस बड़े मौके पर राहुल गांधी का ना होना एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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क्या राहुल राष्ट्रपति चुनाव को नही मानते महत्वपूर्ण

देश में राष्ट्रपति पद के लिए पक्ष और विपक्ष ने अपने-अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए है लेकिन एक बात है जो हैरान करती है वो यह कि विपक्ष द्वारा जब अपना प्रत्याशी घोषित किया जाता है और पार्टी में अहम किरदार निभाने वाले राहुल गांधी ही मौजूद ना हो। मीरा कुमार का राहुल की उनुपस्थिती में नामांकर दाखिल करना कई बड़े सवाल सबसे सामने खड़े करता है। क्या राहुल गांधी देश में राष्ट्रपति चुनाव को महत्वपूर्ण नही मानते? क्या मीरा कुमार को 17 दलों की राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाने में राहुल गांधी की सहमति नही है? क्या अन्य दलों द्वारा राहुल को समर्थन नही मिला? क्या विपक्षी दल नही चाहते है कि राहुल गांधी इस चुनाव में साथ रहे? ऐसे कई सवाल है जो राहुल गांधी के ना होने पर उतपन्न हो रहे है।

आंतरिक मामलों से घिरी हुई है कांग्रेस

कांग्रेस पार्टी कई मुद्दों पर आंतरिक कलह से घिरी हुई है। जहां राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच आंतरिक मदभेद चल रहे है वहीं गुजरात में भी कांग्रेस के एक असंतुष्ट नेता शंकर सिंह बाघेला इटली गए राहुल गांधी से एक मुलाकात का इंतजार रहे है है। बाघेला वो नेता है जो गुजरात के करीब 30 विधायकों पर अपनी पकड़ रखते है राष्ट्रपति चुनाव है तो क्या राहुल को बाघेला से बात नही करनी चाहिए। अगर राहुल गांधी बाघेला से बात नही करते तो इसका खामियाजा कांग्रेस सहीत विपक्षी दलो को भुगतना पड़ सकता है। कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के देश मे राष्ट्रपति चुनाव के समय मे विदेश में रहना कुछ असमंजस की स्थिती पैदा करता है लेकिन अब देखना है कि क्या राहुल के हाथों के कांग्रेस की बागड़ोर ढीली होती जा रही है जिस कौन थामता है और इस डूबती नैया के खैवया कौन बनता है।

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