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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस शनिवार को चीन के राजदूत से मुलाक़ात की। शनिवार 8 जुलाई को हुई इस मुलाक़ात की ख़बर कांग्रेस ने दो दिनों तक छुपाये रखी। राहुल गांधी ने भी इस गुपचुप भेंट के बारे में कुछ नहीं बताया। चीनी दूतावास ने अपनी वेबसाइट पर पहले इस मुलाक़ात का ज़िक्र किया हुआ था। लेकिन भारतीय मीडिया में इस मुलाक़ात के छाने के बाद जैसे ही इसके कारणों पर चर्चाये होने लगी, चीनी दूतावास ने झट से वह पोस्ट अपनी वेबसाइट से हटा ली। अब यहाँ सवाल उठते है कि इन दिनों जहाँ सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन के बीच तनातनी चल रही है, तो ऐसे समय में देश की राष्ट्रीय पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी का चीन के राजदूत से मुलाक़ात करने का क्या मतलब? यह सवाल आज राजनीती की समझ रखने वाले हर आम और ख़ास भारतीय के मन-मस्तिष्क में उठ रहा है। और सवाल का उठना जायज़ भी है कि जब हमारी सैनिक पोस्ट पर चीन की तरफ से हमले हो रहे है, जब सीमाओं पर कदमताल तेज़ हो गई है ऐसे समय में दुश्मनी के रवैये वाले देश के प्रतिनिधि से चोरी-छिपे मुलाक़ात के क्या मायने?

मुलाक़ात की बात छुपाई क्यों गई?

राहुल गांधी और चीन के राजदूत ‘लू झाओहुई’ की मुलाक़ात को तीन दिन हो चुके है, लेकिन कांग्रेस या राहुल गांधी ने स्वयं आगे आकर इस मुलाक़ात के बारे में नहीं बताया था। जब मीडिया गलियारे में यह बात पहुंची तो कांग्रेस ने इन ख़बरों को फ़र्ज़ी बताया। इस ख़बर को दिखने वाले चैनल को भी कांग्रेस ने झूठा करार दे मामले को दबाना चाहा। लेकिन जब चीनी दूतावास से इस मुलाक़ात की पुष्टि हो गई तो कांग्रेस ने भी आखिरकार क़बूल ही लिया कि मुलाक़ात हुई थी। इस मुलाक़ात के लिए चीनी राजदूत ‘लू झाओहुई’ राहुल गाँधी के घर पहुंचे थे।

बाद में कांग्रेस उपाध्‍यक्ष ने इस सिलसिले में ट्वीट कर कहा कि- ”महत्‍वपूर्ण मुद्दों पर जानकारी लेना मेरा काम है।” राहुल का यह ट्वीट लोगों के बीच मज़ाक का विषय बनकर रह गया है कि आख़िर राहुल गांधी इतने समझदार कब से हो गए?

यह गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ही चीनी राजदूत ‘लू झाओहुई’ ने एक इंटरव्यू में कहा था कि भारत और चीन के बीच “समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है,” और किसी भी वार्ता को शुरू करने के लिए भारत को अपने सैनिक वापस बुलाने ही होंगे।

भारत-चीन सीमा पर बढ़ रहा है गतिरोध:

भारतीय उत्तर-पूर्वी राज्य सिक्किम की सीमा के निकट भारतीय सेना ने अपनी चौकी बना रखी है। इस इलाके को अपना बताते हुए चीन ने भारत द्वारा वहां से सेना हटा लेने की चेतावनी दी। भारत ने भी मज़बूत पक्ष रखते हुए चीन की इस कायराना धमकी को नज़रअंदाज़ कर दिया है। कुछ दिन पहले  चीन ने भारत-भूटान सीमा पर डोकलाम में सड़क बनानी चाही, लेकिन भारतीय सैनिकों ने चीनी फौजियों को रोक दिया। भारत तथा हिमालय की गोद में बसा भूटान इस समय राजनयिक तथा सैन्य समर्थन के लिए भारत पर निर्भर है। चीन की घटिया हरकतों का माकूल जवाब देने के लिए भारत तैयार है।

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