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राजस्थान में एक समय आतंक का पर्याय रहा गैंगस्टर आनंदपाल सिंह का अब नाम और निशाँ मिट चुका है। कई लोगों की बेरहमी से लेने वाला यह अपराधी भी आख़िर बड़ी निर्दयी मौत मारा गया। अपनी ज़िन्दगी के अंतिम डेढ़ साल भगौड़े और कायर की तरह छुपते हुए ज़िन्दगी बितायी। और जब मारा तो किसी का कांधा भी नसीब नहीं हुआ। आनंदपाल से पीड़ित लोगों की ही बद्दुआ थी शायद, जो 20 दिन तक इसकी देह अपने डाह को तरसती रही। आनंदपाल मर चुका है। लेकिन इसके मरने के साथ ही राजपूत समाज के कुछ बनावटी नेताओं की राजनीति ज़िंदा हो गयी। 20 दिनों तक आनंदपाल की लाश को कलंकित कर उसके सहारे राजनैतिक सीढ़ी चढ़ने वाले नेता अब मिटटी में मिल चुके इसके शरीर की राख से अपनी राजनीति चमकाने में लगे है। इतने दिनों से नागौर के आस-पास और आनंदपाल के गाँव में हंगामा करने वाले समाज के ढोंगी नेता अब राजधानी जयपुर में उत्पात मचाने की सोच रहे है।

जयपुर कूच की दी चेतावनी:

आनंदपाल की मौत के बाद अपनी पहचान बनाने में जुटे अनेक राजपूत समाज के राजनैतिक नेता अब आनंदपाल से जुडी छोटी से छोटी बात को भी तूल देने में लगे है। अब जब राजस्थान पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कह दिया कि आनंदपाल पुलिस की बहादुरी से परिपूर्ण जवाबी कार्यवाही में मारा गया था उसके बाद भी ये समाज के ठेकेदार आनंदपाल की मौत के मामले को उछाल-उछाल कर अपनी राजनैतिक ज़मीन तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। अब आनंदपाल की मौत को हल्ला बनाने वाले समाज के नेताओं ने आने वाली 22 तारीख़ को जयपुर कूच की चेतावनी दी है। राजधानी में हिंसा और हुड़दंड रोकने के लिए सरकार पूरी तरह से काम कर रही है।

सरकार चाहती है राज्य में शांति व्यवस्था बनी रहे:

आनंदपाल समर्थकों द्वारा किया जा रहा तमाशा रोकने के लिए सरकार कई बार जनहित को ध्यान में रखकर इनके आगे झुक चुकी है। जयपुर कूंच की चेतावनी देने के बाद सोमवार को सरकार ने आनंदपाल  समर्थकों को शांतिवार्ता का न्याेता भेजा है। इसके तहत अब मंगलवार को राजपूत समाज के पदाधिकारी और नेतागण प्रदेश के गृहमंत्री से बात करने सचिवालय जाएंगे। प्रदेश में शान्ति व्यवस्था बनाये रखने के लिए सरकार हर तरह का प्रयास करने को तैयार है। आंदोलन को ख़त्म करने के लिए सरकार हिंसात्मक आंदोलनकारियों को गिरफ्तार भी कर सकती है। राजपूत सभा भवन के अध्यक्ष गिर्राज सिंह लोटवाड़ा ने बताया कि आंदोलन का आगे का कार्यक्रम सोमवार को सरकार के साथ होने वाली मीटिंग के बाद तय किया जायेगा।

पूरी तरह से जातिवाद की राजनीति कर रहे है कई नेता:

आनंदपाल की मौत को राजनीती का मोहरा बनाकर इतने दिनों से खेल रहे राजपूत समाज के तीन विधायक मनोज न्यांगली, भंवर सिंह भाटी और गिर्राज सिंह मलिंगा के साथ ही पूर्व विधायक राजेन्द्र सिंंह गुढ़ा भी अपनी औछी राजनीति से बाज़ नहीं आ रहे है। साथ ही सुखदेव सिंह गोगामेड़ी और लोकेन्द्र कालवी जैसे नेता इस हंगामे से अपनी सुर्खियां बढ़ाने में लगे है। ये भविष्य में राजनीति के अवसर तलाश रहे है।

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