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राजस्थान के खूंखार अपराधी आनंदपाल की मौत पर सियासत का तांडव करने वालों शह पर राजस्थान चल रहा है। मृतक आनंदपाल के अंतिम संस्कार को लेकर कुछ लोगों ने पूरे राजस्थान में बवाल मचाया हुआ है। बुधवार को राजपूत समाज ने आनंदपाल के गांव सांवराद में श्रद्धांजली सभा के आयोजन के नाम पर कुछ स्थानीय नेता अपनी राजनीति की रोटियां सेकने में लगे हुए है। श्रद्धांजली सभा में जमा भीड़ को नेताओं के भाषणों ने उग्र किया और पुलिस के 25 जवानों से मारपीट की। उपद्रवी भीड़ ने करीब नौ  बजे सांवराद रेलवे स्टेशन की पटरिया उखाड़ दी, पुलिस अधीक्षक पारिश देशमुख की गाड़ी को आग लगा दी, भीड़ ने जवानों की एके 47 राइफलें छीन फायरिंग की। हालात बेकाबू हो गए, शांति व्यवस्था को ताक पर रख आनंदपाल के परिजनों और उसके नाम पर बवाल करने वालों ने इस तरह से अपने बेटे को श्रद्धांजली दी है। घायल पुलिसकर्मियों को जयपुर भर्ती किया गया है और पुलिस ने एतिहात के तौर पर सांवराद में कर्फ्यु लगाया है। उधर, राज्य मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को निर्देश दिए है कि मृतक के शरीर का निस्तारण आगामी 24 घंटों में करें। मानवाधिकार आयोग ने मुख्य सचिव और गृह सचिव को निर्देश दिए है कि आनंदपाल के शव का 24 घंटों में अंतिम संस्कार करना सरकार की जिम्मेदारी है उसे पूरा करें।

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आज वाकई में राजस्थान जल रहा है

कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया में मोबाइल की वॉयस रिकॉर्डिंग वायरल हो रही थी जिनमें एक शख्स दूसरे व्यक्ति से कह रहा था कि राजस्थान जल रहा है इसका फायदा उठा लो, वाकई में कुछ लोगों ने राजस्थान को जलाने में कोई कोर-कसर नही छोड़ी। एक अपराधी, गैंगस्टर और हत्यारें को मौत के बाद दूसरें लोगों की जान पर खेल कर क्या उसे श्रद्धांजली दी जा सकती है। वाकई में आनंदपालको श्रद्धांजली देने आये लोग उसके फॉलोअर थे जो मारकाट-हिंसा करने के लिए ही सांवराद में इकट्ठे हुए थे। श्रद्धांजली सभा के नाम पर मातम मनाने आई भीड़ को नेताओं ने अपने कड़वे भाषणों से उग्र बनाया और पुलिस के जवानों को पीटने के साथ ही गांवों में हिंसा फैलाने के लिए प्रेरित किया।

एक शव का अंतिम संस्कार करने की बजाय उस पर सियासत कर रहे है कुछ लोग

अपराधियों की शह पर राजनीति करने वालों को जनता का दुख-दर्द कब समझ में आता है। कुछ नेता तो इसे अपना भाई तो कुछ बेटा बुलाने वाले लोगों को आनंदपाल जिंदा क्यों नही दिखाई दिया। आनंदपाल तो चला गया लेकिन मरने के बाद भी उसने लाखों लोगों की बददुआएं अपने सिर ली है। उपद्रवी भीड़ ने यातायात जाम कर दिया, ट्रेने नही आ जा सकी, बसों में आग लगाई। आखिर क्यों एक मृतात्मा की अन्तेष्टी करने की बजाय उसके नाम पर प्रदेश के लोगों पर अत्याचार क्यों हो रहा है। राजनेताओं ने सांवराद में आकर अपनी आगे आने वाले चुनाव की टिकट तो पक्की कर ली लेकिन इस तरह से अगर कोई नेता बनता है तो कैसे जनसेवक के रूप में काम करेगा जो लोगों की लाशों पर चला हो।

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24 घंटों में राज्य सरकार को अंत्येष्टी करने के निर्देश

आनंदपाल की मौत पर राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष प्रकाश टाटिया ने संज्ञान तेले हुए मृतक का अंतिम संस्कार 24 घंटों के भीतर करने के निर्देश दिए है। एक शव को लेकर बेठे लोगों को यह पता होते हुए भी उसका संस्कार नही कर रहे कि उससे हजारों लोगों में संक्रमण फैल सकता है। लोग मर सकते है। कोई बाप, मां, बेटी और पत्नी इतनी क्रूर कैसे हो सकती है। आखिर आनंदपाल के नाम पर राजस्थान को जलाने वालों के लिए भी कोई सजा है या नही। आनंदपाल ने अपने जीवित रहते जितने अपराध किए थे उतने शायद कल जमा भीड़ ने भी कर दिए तो क्या इसकी कोई कीमत नही है। आज एक आनंदपाल ने राजस्थान की शांति में आतंक फैला दिया है कल को अगर दो-चार आनंदपाल पैदा हो गए तो राजस्थान की भस्म कों बंटोरने वाला कोई नही रहेगा।

एक अपील- अपने बेटों को आनंदपाल बनने से रोकें माता-पिता

आनंदपाल के नाम राजनीति करने वाले करें लेकिन प्रदेश के युवाओं और माता-पिताओं से अपील है कि अपने पुत्रों को भविष्य गर्त में नही झोंके। आनंदपाल मर गया लेकिन इन युवाओं को, अपने बेटों को राजस्थान का दूसरा आनंदपाल बनने से रोकें। माता-पिता अपने बच्चों को समझाएं की अपराधियों की कोई जात-पात नही होती, क्राइम करने वालों की समाज में कोई जगह नही होती। आज आनंदपाल मारा गया है कल कोई और अपराधी मारा जाएगा। अपने बेटों को आनंदपाल बनने से रोकें नही तो हो सकता है कि एक दिन आपके बेटे पर भी ऐसी सियासत होगी।

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