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मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे किसानों के हित में कार्यक्रम तथा नीतियां बनाकर कार्य कर रही है। इसी तरह से राजस्थान में न्याय आपके द्वार अभियान शुरू किया गया है इससे काश्तकारों को राजस्व संबंधी प्रकरणों के शीघ्र निपटारे में मदद मिल रही है। न्याय आपके द्वार कार्यक्रम में ग्रामीण आपस में बैठकर राजीनामा करने के साथ-साथ फिर से पारिवारिक प्रेम व सौहार्द की तरफ अपने कदम शिद्दत के साथ बढा रहे हैं। साल 2017 में 8 मई से शुरु हुए न्याय आपके द्वार अभियान के तहत 27 मई तक प्रदेश भर में 16 हजार से ज्यादा मामलों का सफलता पूर्वक निस्तारण किया जा चुका है। इस अभियान के तहत सबसे ज्यादा हनुमानगढ़ जिले को लोगों को राहत मिली हैं। जिले में 11.48 फीसदी राजस्व मामलों का निस्तारण किया गया है।

इन जिलों में हुआ इतने मामलों का निस्तारण

राजस्थान सरकार के महत्वकांक्षी अभियान न्याय आपके द्वार अभियान के तहत प्रदेश में सबसे अधिक हनुमानगढ़ जिले के 11.48 फीसदी राजस्व मामलों का निस्तारण किया गया है। इसके अलावा अजमेर में 10.16 फीसदी, टोंक में 9.74 फीसदी, कोटा में 10.31 फीसदी, चूरू में 8.39 और जयपुर में 8.54 फीसदी मामलों की निस्तारण किया गया है। इसके अलावा दौसा में 8.02 फीसदी, धौलपुर में 08.13 फीसदी, झालावाड़ में 07.88 फीसदी, भीलवाड़ा में 7.87 फीसदी और बूंदी में 8.55 फीसदी मामलों का निस्तारण किया गया है।

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50 साल पुराने मामलों का हो रहा है निस्तारण

न्याय आपके द्वार से बहुत से मामलो का निपटारा हुआ है जो मामले 50 वर्षो से भी खिंचे आ रहे है उनका भी निपटारा हुआ है। इससे गरीब एवं किसान भाइयो को बहुत फायदा हुआ है उनके समय एवं धन की बचत हुई है। पहले उन्हें अदालत में जाना पड़ता था लेकिन न्याय आपके द्वार कार्यक्रम से उनके निपटारे जल्दी से एवं प्रेमभाव से हो रहे है। न्याय आपके द्वार’ कार्यक्रम के अंतर्गत राजस्व लोक अदालत अभियान ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहा है। राजस्व लोक अदालतों से जहां लंबे समय से न्याय की आस लगाये फरियादियों को चन्द मिनटों में न्याय मिल रहा है, वहीं लोगों में न्याय व्यवस्था के प्रति सम्मान बढ़ रहा है।

शिविरों में हो रहे है यह काम

राजस्व लोक अदालतों के तहत शिविरों में खाता विभाजन, सीमाज्ञान, पत्थरगढ़ी, नामांतरण एवं राजस्व अभिलेख में रिकॉर्ड के शुद्धिकरण सहित जनता की सुविधा के लिए कई प्रकार के कार्य मौके पर संपादित किए जा रहे है। राजस्थान काश्तकार अधिनियम 1955 की धारा 55,88,188 एवं 183 के तहत दर्ज मुकदमे एवं इजराज से संबंधित कार्य संपन्न हो रहे है। भू-राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 136 के तहत लंबित प्रार्थना पत्र एवं नामांतरण तथा धारा 91 की कार्यवाही के संबंध में लंबित अपीलों के कार्य हो रहे है। इसके साथ ही विभिन्न तरह के लंबित वादों एवं प्रार्थना पत्रों के संदर्भ में प्रकरणों को आवश्यकतानुसार लोक अदालतों में रखा जा रहा है। इसी प्राकर न्याय आपके द्वार अभियान के शिविरों में बंद रास्तो को खुलवाने, सकड़े रास्तों से  अतिक्रमण हटाने तथा नए रास्ते दर्ज कराने सहित रास्ता संबंधी समस्याओं का निवारण किया जा रहा है। इसके साथ ही इस महत्वकांक्षी अभियान में परिवारिक कृषि भूमि के सहमति से विभाजन के नवीन प्रकरण दर्ज किए जा रहे है, और ग्राम पंचायतों में लगने वाले शिविर के दिन इनका निस्तारण किया जा रहा है।

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