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आगामी दिनों में अगर आप कोई शुभ कार्य करने जा रहे हैं तो एक बार इस खबर को जरूर पढ़ लेवें। आज से यानि 4 जुलाई से हिंदु धर्म में सभी शुभ कार्य वर्जित है। इसका कारण है देव शयनी एकादशी। जिसमें आप अपना गृह प्रवेश, विवाह समारोह आदि नहीं कर पाएंगे। कहा जाता है कि देवशयनी एकादशी के साथ ही मंगलवार से देव सो गए हैं, जो अब चार महीने बाद यानि 31 अक्तूबर को देवउठनी एकादशी पर ही जागेंगे। देवउठनी एकादशी को छोटी दीपावली भी कहा जाता है। उस दिन दीप जलाकर आतिशबाजी की जाती है, साथ ही विवाह समारोह की शुरुआत भी होती है।

31 अक्टुबर तक नही होंगे कोई शुभ कार्य

दरअसल 4 जुलाई से चातुर्मास की शुरुआत हो गई है। ऐसा माना जाता है कि आगामी चार माह सावन, भादो, अश्व‍िन और कार्तिक में भगवान विष्णु चिर निद्रा में चले जाते हैं। भगवान विष्णु के सो जाने का मतलब है कि इन चार महीनों में कोई शुभ या मांगलिक काम नहीं हो पाएंगे। ऐसे में 4 जुलाई से 31 अक्टूबर तक किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य को शुभ नहीं माना जाता।

दुष्प्रभावों से बचने के लिए ये काम ना करें

जानकारों का मानना है कि सावन के महीने में साग और हरी सब्ज‍ियां नहीं खानी चाहिए। इसी क्रम में भादो में दही और अश्व‍िन महीने में दूध से बने पकवान नहीं खाने चाहिए। वहीं कार्तिक मास में दालों का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दौरान मांस-मदिरा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कुछ जानकार इस दौरान शरीर पर तेल नहीं लगाने के साथ ही कांसे के बर्तन में खाना न खाने की सलाह देते हैं।हालांकि इस दौरान किसी प्रकार की देवी पूजा, तपस्या, हवन पूजन पर कोई रोक नहीं होती। इस दौरान कथा आयोजन, पूजन-यज्ञ या कोई धार्मिक अनुष्ठान करवाया जा सकता है।

देवशयनी एकादशी का क्या है महत्व

एकादशी का हमारे शास्त्रों में विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार देवताओं को एकादशी सबसे प्रिय होती है।  इस बार देवशयनी एकादशी के व्रत का परायण 5 जुलाई को सुबह 7:56  से 9:28 के बीच किया जाएगा। व्रत के साथ ही एकादशी के दौरान मंदिर में दीपदान, घर में कीर्तन, तुलसी पूजन एवं गुप्त दान करने से अच्छे फल की प्राप्ति होती है। देवशयनी एकादशी आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में आती है। इसे हरिशयनी, देवशयनी, विष्णुशयनी, पदमा या शयन एकादशी भी कहा जाता है। सूर्य के मिथुन राशि में आने पर यह एकादशी आती है। इसी दिन से चातुर्मास शुरू होता है। यानी इस दिन से भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं और फिर चार माह बाद जिस दिन उन्हें उठाया जाता है, उसे देवोत्थानी एकादशी कहा जाता है। कहा जाता है कि आज के बाद से हिंदू धर्म के सभी शुभ काम अगले चार महीने तक बंद हो जाएंगे और फिर देवोत्थान एकादशी से मांगलिक कार्य शुरू होंगे।

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