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पंजाब के पठान कोट एयर बेस पर आतंकी हमले के दौरान गैर जिम्मेदाराना फुटेज दिखाने पर केन्द्र सरकार ने एनडीटीवी इंडिया न्यूज चैनल को 9 नवम्बर को अपना प्रसारण बंद रखने के आदेश दिए हैं। एनडीटीवी पर एक दिन का प्रतिबंध लगाने का मामला बहस का विषय हो सकता है, लेकिन इसके साथ ही केन्द्र सरकार को उन न्यूज चैनलों पर भी कार्यवाही करनी चाहिए, जो बहस के दौरान पाकिस्तान के पत्रकारों, पूर्व सैनिकों, राजनेताओं आदि को शामिल करते हैं। जो जागरुक दर्शक भारतीय चैनलों पर पाकिस्तानियों को सुनते हैं, उन्हें पता है कि पाकिस्तानी भारत के खिलाफ किस तरह से जहर उगलते हैं। सवाल उठता है कि हमारे चैनल पाकिस्तानियों को देश विरोधी बात कहने का मंच क्यों उपलब्ध करवाते हैं? जब केन्द्र सरकार गैर जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग के लिए एनडीटीवी का प्रसारण एक दिन के लिए बंद करवा सकती है तो फिर उन चैनलों के खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिए जो पाकिस्तानियों को मंच उपलब्ध करवाते हैं। पाकिस्तानी हमारे ही चैनलों पर बैठ कर हमारे ही देश के खिलाफ बोलते हैं। गंभीर बात तो यह है कि पाकिस्तान के किसी भी न्यूज चैनल पर हमारे देश के लोगों को बहस में शामिल नहीं किया जाता। सवाल उठता है कि जब पाकिस्तानी चैनल हमारे लोगों को नहीं बुलाते तो फिर हमारे चैनल पाकिस्तानियों को क्यों शामिल करते हंै? सब जानते हैं कि पाकिस्तान के न्यूज चैनलों पर राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल जैसों को बार-बार दिखाया जाता है, क्योंकि ये दोनों नेता पाकिस्तान की आवाम के चहेते हैं। पूर्व सैनिक राम किशन की खुदकुशी के मामले में जिस तरह से इन दोनों नेताओं ने बयान बाजी की है, उससे पाकिस्तान को भारत सरकार को घेरने में मदद मिली है। ऐसा प्रदर्शित किया जा रहा है कि केन्द्र सरकार के रवैये से भारतीय सेना में नाखुशी है। पूर्व सैनिक राम किशन की खुदकुशी का मामला जांच का विषय है। लेकिन जिस तरह से देश में राजनीति हो रही है, उसे किसी भी स्थिति में देशहित में नहीं माना जा सकता।
(एस.पी.मित्तल)

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