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राजस्थान के कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह की मौत के 17वें दिन आज उसके पैतृक गांव सांवराद में राजपूत समाज द्वारा श्रद्धांजली सभा का आयोजन किया जा रहा है । मौत के 17 दिन बाद भी मृतक आनंदपाल  के परिजनों ने अभी तक उसकी अंत्येष्टी नही की है। राजपूत समाज और कुछ राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोगों ने हार्डकोर ईनामी बदमाश को राजस्थान का भगवान बना दिया है तथा आनंदपाल का मंदिर बनाने की तैयारी कर रहे हैं। राजस्थान सहित पांच राज्यों के अपराधी रहे आनंदपाल को कुछ लोगों ने प्रदेश के युवाओं के लिए जहां आदर्श बना दिया है तो कुछ लोगों ने राजस्थान के राजपूत समाज को बरगलाने का काम किया है। दरअसल राजस्थान में आनंदपाल जैसे अपराधी की मौत के बाद उसके पैरोकार उसके लिए इंसाफ मांगने के लिए आए है लेकिन क्या किसी ने सोचा है कि आनंदपाल की मौते के बाद उसकी पैरवी करने वाले ये लोग उस वक्त कहां थे जब वह लाशों पर लाशें बिछा रहा था। किसी ने यह जानने की कोशिश नही की कि आनंदपाल एक अपराधी था और अपराध करने वाले को क्या सजा मिलनी चाहिए।

जब मेरे अपने ही कर रहे है मेरी लाश पर राजनीति

आनंदपाल की मौत के बाद राजपूत समाज और कुछ राजनेताओं की बल्ले-बल्ले हो गई है। गैंगस्टर के मरने के बाद उसका परिवार ही उसकी लाश पर राजनीति कर रहा है। एक सवाल प्रदेश के इन लोगों से और उसके परिवार से है कि जब आनंदपाल लगातार अपराध कर रहा था, मर्डर और लूट, डकैती जैसे अपराध करने से उसे क्यों नही रोका गया। राजस्थान की शांति और कानून व्यवस्था को अपने हाथों में लेने वाले इन लोगों ने आनंदपाल को अपराध करने से क्यों नही रोका। एक बाप जो अपने बेटे की लाश पर पिछले 17 दिनों से रो रहा है, क्या कभी उन्होने सोचा है कि उनके इस बेटे ने कितने पिताओं की संतानों को हमेशा के लिए सुला दिया। केवल बाप ही नही मृतात्मा आनंदपाल की मां, बहन, पत्नी और बेटी भी उसके शव को घर में रख कर उन लोगों का साथ दे रही है जो आनंदपाल के नाम से चिढ़ते थे। आनंदपाल एक हत्यारा, डकैत, लूटपाट करने वाला अपराधी था, पुलिस ने उसे कई बार अपने हाथ खड़े करने के लिए कहा था लेकिन अपराधी हमेशा उलट ही होता है, पुलिस पर फायरिंग करने के बाद उसकी मौत का वो गीत लिखा गया जो आज कुछ विशेष लोगों और उसके परिवार द्वारा गाया जा रहा है।

क्या राजस्थान के राजपूत वीरों की शहादत को भुला दिया गया है?

राजस्थान की वीर धरती मां अपनी राजपूत बेटों की सरहद पर शहादत के लिए जानी जाती है। इस मां ने न जाने अपने कितने ही लाल इस देश की सरहद पर न्योछावर कर दिए। राजस्थान में आनंदपाल जैसे न जाने कितने ही अपराधी हुए है और लूटपाट, हत्या करते हुए एक दिन खुद भी किसी की गोली का शिकार हो जाते है। गैंगस्टर आनंदपाल भी राजपूत ही था लेकिन उसकी मौत के बाद कुछ लोगों ने अपनी राजनीतिक साख बढ़ाने के चक्कर में प्रदेश के उन शहीदों को भुला दिया है जिन्होने देश की रक्षा में अपना बलिदान दिया था। आज राजस्थान के युवा उस अपराधी आनंदपाल का नाम जप रह है और उसे ही राजपूत समाज का आदर्श बना दिया है तो क्या राजस्थान के जवानों ने इस धरती के वो वीर सपूत भुला दिए है जो सीमा पर शहीद हो रहे है। आनंदपाल जैसे हत्यारें को अपना आदर्श मानने पर हर किसी को घिन्न आ सकती है लेकिन कुछ लोगों ने इसे राजस्थान का ट्रेंड बना दिया है|

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