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MJSA: उदयपुर से 100 किमी दूर भींडर के पहाड़ में पानी पैदा करने की अनूठी मुहिम।

राजस्थान को अब तक देश का सबसे कम वर्षा वाला राज्य माना जाता रहा है। और यह बात सच भी है कि अन्य राज्यों के मुकाबले प्रदेश में वर्षा अक्सर कम होती है। कई बार तो राज्य के लोगों को, खासतौर पर किसानों को भयंकर सूखे का सामना करना पड़ता है। अब तक राजस्थान का दीदार नहीं कर पाए देश के अन्य राज्यों के लोगों के मन में राजस्थान की छवि दूर-दूर तक फैले रेत के टीलों वाली जगह है। अक्सर मीडिया में जब कोसों दूर से पानी लेकर आती हुई राजस्थानी महिलाओं की फोटो छपती है तो कैप्शन होता है पानी की बूंद-बूंद को तरसता राजस्थान। सूखे कुएं देखकर स्थानीय लोग कभी खुद, तो कभी सरकार और कभी भगवान को कोसते नज़र आते थे। लेकिन कभी किसी ने यह नहीं सोचा की कुओं, तालाबों को फिर से जिंदा किया जाए। यह सोचा तो सिर्फ सूबे की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जल स्वावलंबन का ऐसा अनूठा अभियान चलाया कि असंभव को भी संभव कर दिखाया। आज 4 साल में इस योजना से राजस्थान के 21 हजार से भी ज्यादा गांवों में पानी के हालात बेहतर हो गए है।

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इसी कड़ी में मिशाल के तौर पर आज हम बात कर रहे झीलों की नगरी उदयपुर से 100 किलोमीटर दूर भींडर पंचायत की। अरावली पर्वतमाला की बीच स्थित पंचायत समिति भींडर के उम्मेदपुरा गांव के लोग सालों से पीने के पानी के लिए कुओं पर निर्भर थे। लेकिन यह पानी भी मात्र 6 माह नसीब होता था। इसके बाद जनवरी से जून माह तक पानी के टैंकरों से पानी की सप्लाई होती थी। लेकिन विशेष तौर पर तेलंगाना से आए मुख्यमंत्री की इस योजना के चेयरपर्सन श्रीराम वेदिरे ने इस समस्या के समाधान के लिए जल संचयन के लिए फॉर वॉटर का फार्मूला बनाया। इससे वर्षा जल, सतही जल, भू जल एवं मृद्धा रिज टू वेली के आधार पर गांव उम्मेदपुरा एवं बोरतलाई के 100 हैक्टेयर के चारागाह में 45 कुएं पानी से लबालब हो गए हैं। इतना ही नहीं वहां इससे पहले 12,000 घनमीटर पानी की क्षमता वाला एक फूटा तालाब था लेकिन अब बनाए गए ढांचों और ट्रेन्चों के कारण 75,000 घनमीटर पानी संरक्षित हो रहा है। इसे बनाने में तकरीबन 20 लाख रूपए की लागत आई है। अगर हम 1 लीटर पानी की कीमत निकालें तो यह तकरीबन 13 पैसे प्रति लीटर तक आती है।

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अब तीन फुट गड्डे खोदने पर आ जाता है पानी: जिस क्षेत्र में सालों से सितंबर अक्टूबर में जमीन में नमीं नहीं होती थी और पूरा पहाड़ सूखा रहता था लेकिन अब इस योजना से तीन फुट गड्डा खोदने पर ही पानी आ जाता है। यही नहीं इस योजना का एक और बड़ा फायदा यह हुआ है कि अब पहाड़ पर हरियाली छाई रहती है। खेती करने और पीने के पानी के लिए क्षेत्र के लोगों को अब साल भर पानी की किल्लत नहीं होगी। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत निर्माण किए गए इन तालाब, कुंड और कुओं से अब प्रदेश के लोगों को पानी की कमी नहीं होगी।

21 हजार गांवों को मिल रहा योजना का फायदा: मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत निर्माण हुए कुंड, एनिकट, तालाब, और कुओं से वर्तमान में प्रदेश के लगभग 21,000 गांवों को लाभ मिल रहा है। इस योजना के प्रथम चरण में 3539 गांवों में कियान्वयन किया गया। इस योजना के लिए मुख्यमंत्री राजे ने एक नारा दिया कि, “दौड़ते जल को चलना सिखाएं, चलते जल को रेंगना सिखाएं और रेंगते जल को रूकना सिखाएं, फिर रूके जल को भूमि में समाहित कराएं।“

 

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