फूलपुर में किसका खिलेगा फूल, जानिए क्यों खास है यह सीट!

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    हाल ही में राजस्थान और पश्चिम बंगाल राज्य में लोकसभा की कुल तीन सीटों पर उपचुनाव हुए हैं। राजस्थान में लोकसभा की अजमेर और अलवर सीट तथा पश्चिम बंगाल के उलुबेरिया लोकसभा सीट पर 29 जनवरी को उपचुनाव हुए थे। इन उपचुनावों का परिणाम 1 फरवरी को घोषित किया गया था। ​इसके बाद अब उत्तर प्रदेश में दो सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं। गोरखपुर व फूलपुर लोकसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए 11 मार्च को वोटिंग होनी हैं। यूपी में शासित भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे से खाली हुई गोरखपुर व फूलपुर दोनों लोकसभा सीटें खाली हुई हैं। इन दोनों सीटों के लिए पार्टी ने अपने अगड़े-पिछड़े समीकरण को आगे बढ़ाते हुए प्रत्याशी उतारे हैं। इन दोनों सीटों के अलावा यूपी में कैराना लोकसभा सीट पर भी उपचुनाव होने हैं। लेकिन कैराना में उपचुनाव कब होंगे अभी यह तय नहीं किया गया है। हाल ही में कैराना सांसद हुकम सिंह की बीमारी के चलते मृत्यु हो गई थी। आइये जानते हैं फूलपुर सीट पर किसका खिलेगा फूल और क्यों खास है यह सीट.. lok sabha by election

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    बीजेपी के लिए नाक का सवाल बनी हुई है फूलपुर लोकसभा सीट

    फूलपुर लोकसभा सीट बीजेपी के लिए नाक का सवाल बनी हुई है। इसकी वजह यह है कि यह सीट 62 साल तक कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के हाथों में रही है। यह सीट इसलिए भी खास है कि यहां से प्रसिद्ध समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया और बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम राणा जैसे दिग्गज भी चुनाव हार चुके हैं। इस सीट पर 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के केशव प्रसाद मौर्य जो अब उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं, उन्होंने यहां पहली बार  भगवा लहराने में कामयाबी हासिल की थी। बीजेपी योगी आदित्यनाथ वाली गोरखपुर सीट को सुरक्षित मानकर चल रही है लेकिन फूलपुर के पुराने इतिहास को लेकर वह थोड़ी सहमी सी नज़र आ रही है। अब फूलपुर में दोबारा फूल खिलाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यूपी के वर्तमान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पर ही है। lok sabha by election

    फूलपुर सीट पर 2014 के आमचुनाव में केशव प्रसाद मौर्य ने पहली बार लहराया भगवा

    फूलपुर सीट 2014 से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का गढ़ रही है। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में केशव प्रसाद मौर्य ने यहां पहली बार भगवा लहराया। जबकि इससे पहले राम मंदिर लहर में भी उसे इस सीट पर बीजेपी को कामयाबी नहीं मिली थी। केशव प्रसाद मौर्य ने 2014 के लोकसभा चुनाव में रिकॉर्ड 5,03,564 वोट हासिल किए थे। वहीं उनके निकट प्रतिद्वंदी समाजवादी पार्टी प्रत्याशी धर्मराज सिंह पटेल को सिर्फ 1,95,256 वोट से ही मिल सके थे। लेकिन अब हो रहे उपचुनाव में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बीजेपी एक बार फिर से फूलपुर में कमल खिला पाएगी? इस उपचुनाव में यहां बीजेपी ही नहीं बल्कि प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के कामकाज की भी असली परीक्षा होने वाली है।

    अभी गणित बीजेपी के पक्ष में, अंतिम परिणाम तय करेंगे किसकी होगी जीत

    फूलपुर सीट पर हो रहे उपचुनाव में जातीय गणित काफी महत्वपूर्ण है। बीजेपी के लिए बड़ी राहत की बात यह है कि यूपी में कुर्मियों की पार्टी कही जाने वाले अपना दल के साथ उसका गठबंधन है। इस पार्टी की प्रमुख अनुप्रिया पटेल वर्तमान मोदी सरकार में मंत्री हैं। माना जा रहा है ऐसे में वह बीजेपी के लिए कुर्मी वोटरों को रिझाने का हरसंभव प्रयास करेंगी। फूलपुर लोकसभा सीट पर सबसे अधिक 2.25 लाख कुर्मी मतदाता हैं। ऐसे में किसी भी प्रत्याशी की हार जीत तय करने में इनकी बड़ी भूमिका रहती है। बीएसपी यहां उपचुनाव नहीं  लड़ेगी जिसका फायदा बीजेपी को होगा। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने यहां जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर टिकट दिए हैं। समाजवादी पार्टी ने फूलपुर से नागेन्द्र सिंह पटेल को उम्मीदवार बनाया है। इसकी वजह यह है कि यहां छह बार पटेल प्रत्याशी चुनाव जीत चुके हैं। कांग्रेस ने जातीय गणित को देखते हुए ब्राह्मण चेहरा मनीष मिश्रा पर अपना दांव खेला है। इस सीट पर ब्राह्मण वोटर्स की संख्या भी 1.5 लाख के करीब है। खैर, अब इतना ही कहा जा सकता है कि फिलहाल चुनावी जीत का गणित बीजेपी के पक्ष में हैं, लेकिन अंतिम परिणाम ही तय करेंगे कि यहां किसकी जीत होगी।

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