कोटा में एक पुलिस कर्मी को शराब पीकर वाहन चलाने के मामले में चालान काटना भारी पड़ गया। इस चालान के चलते कोटा का लाखों रुपयों का नुकसान तो हुआ ही साथ ही पुलिस और राजनेताओं की छवि पर को भी भारी नुकसान पहुंचा। राजस्थान पुलिस को एक चालान काटना भी इतना भारी पड़ सकता हैं यह शायद सीआई श्रीराम बड़ेसरा ने सोचा भी नही होगा।

दरअसल शराब पीकर वाहन चलाने का चालान बनाने के मामले में सोमवार को कोटा के महावीर नगर थाने में जमकर हंगामा हुआ। हंगामा विधायक चंद्रकांता मेघवाल के पति नरेन्द्र मेघवाल द्वारा सीआई श्रीराम बड़ेसरा को चांटा मारने और लॉकअप तोड़ने की धमकी देने के बाद शुरू हुआ। पति के साथ पुलिस ने महिला विधायक को को भी हिरासत में ले लिया था।

पूरे मामले को लेकर अगर कहा जाए तो बात इतनी सी होती हैं कि एक चालान काटने का आखिर कोटा के लोगों ने या युं कहा जाए की एक विधायक के समर्थकों ने इतना हंगामा क्यों किया। क्या कानून राजनेताओं के लिए बिल्कुल बेअसर हैं। क्या एक थानेदार को थाने में ही थप्पड़ मारा जा सकता हैं। हम इसकी तह तक नही जाते हुए इतना बता रहे हैं कि  मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पास जब मामला पहुंचा तो उन्होने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इंटेलिजेंस के एडीजी को लगाया और मामले की न्यायपूर्ण निष्पक्षता से जांच के आदेश दिए।

आखिर क्या हैं पूरे मामले में कोटा पुलिस का सच

हम कोटा विधायक चंद्रकांता के मुद्दों को जानने से पहले कोटा पुलिस की सच्चाई से आपका तारूफ करवा देते हैं। दरअसल शराब पिकर वाहन चलाने के मामले में कोटा विधायक चंद्रकांता मेघवाल के समर्थक का पुलिस ने 100 रुपए का चालान काटा।

चालान काटने के बाद विधायक एवं विधायक पति अपने समर्थकों के साथ थाने पहुंचे और चालान काटने का विरोध किया। पुलिस ने विरोध करने वाले समर्थकों को हिरासत में ले लिया था इनमें रामगंज मंड़ी से महिला विधायक चंद्रकांता मेघवाल के पति नरेंद्र मेघवाल भी शामिल थे।

पति सहित समर्थकों का पुलिस का विरोध एवं हिरासत में लेने की खबर सुनकर विधायक चंद्रकांता भी थाने पहुंची और पुलिस का विरोध किया तथा पति सहित समर्थकों को छोड़ने को लेकर हंगामा किया।

मामले में बातचीत चल ही रही थी कि कुछ कि विधायक पति नरेंद्र सिंह ने सीआई श्रीराम बड़ेसरा को थप्पड़ मार दिया और पुलिस ने हंगामा कर रही भीड़ को तीतर-बीतर करने के लिए बलप्रयोग किया।

मामला इतना बिगड़ा कि पुलिस को दंगाईयों को खदेडने के लिए बार बार बल प्रयोग करना पड़ा। और दंगाईयों ने कोटा के एलआईसी भवन के पास स्थित आईओसी के पेट्रोल पंप को आग के हवाले कर दिया।

रामगंजमंड़ी से महिला विधायक चंद्रकांता का क्या हैं बयान

पूरे मामले में महिला विधायक का कहना हैं कि पुलिस ने चालान काटने के नाम पर विधायक पति और समर्थकों के साथ बदतमीजी की। इसके बाद पुलिस ने समर्थकों को हिरासत में लेकर मारपीट की जिसमें उनके पति का हाथ फेक्चर हो गया । विधायक चंद्रकांता मेघवाल का कहना हैं कि पुलिस ने उनके साथ भी बदतमीजी  औऱ मारपीट की। उन्होने कहा कि पुलिस ने उन्हे गार्डन और चैंबर में ले जाकर पीटा। चंद्रकांता मेघवाल का कहना हैं कि करीब 20-25 लट्ठ उन्होने और उनके पति  ने कार्यकर्ताओं का बचाने के लिए झेले। बचाने आए मेरे पति व जिलाध्यक्ष को भी पीटा। विधायक का कहना हैं कि मेरे समझ में यह नहीं आता कि हमने ऐसा क्या गुनाह कर दिया था? मेरे हाथ में फ्रैक्चर हो गया, साड़ी फट गई और लाठियों के वार झेलने से कड़े टूट गए।

विधायक का सबसे बड़ा बयान

चालान काटने के मामले को लेकर विधायक चंद्रकांता का कहना हैं कि जाट समाज के लोगों ने एससी समाज के साथ मारपीट की और अभद्र व्यवहार किया। लेकिन मामले में जाट और एससी का कोई लेना देना नही था। चुंकि मुख्यमंत्री राजे ने भी स्पष्ट कर दिया हैं कि प्रदेश में जाति के नाम पर राजनीति करने की कोई आवश्यकता नही हैं जो दोषी हैं उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष

हम कोई पंचायत या कोई कोर्ट नही हैं जो इस मामले का फैसला सुना दे। हम आपकों मामले की तह तक ले जाने का काम कर सकते हैं जो आपकों निर्णय लेने के लिए मजबूत बनाता हैं। हम आपकों एक वीडियों दिखाने जा रहे हैं जिसे देखकर आप यह निर्णय ले सके की आखिर गलती किसकि थी और वास्तविकता में दोषी कौन हैं।

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