राजस्थान हाईकोर्ट ने गुर्जरों को आरक्षण देने के सरकारी आदेश पर जो रोक लगाने का फैसला दिया। उसे 22 दिसम्बर को 6 सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है यानि अब गुर्जर समुदाय के युवाओं को पूर्व की तरह विशेष कोटे में 5 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा।

22 दिसम्बर के आदेश का सबसे ज्यादा असर लोक सेवा आयोग पर पड़ेगा। आयोग कॉलेज व्याख्याता, स्कूल व्याख्याता, जूनियर अकाउंटेंट आदि परीक्षाओं के परिणाम तैयार करवा रहा है। पूर्व में 5 प्रतिशत विशेष कोटे को हटाकर तैयारियां की गई थी, लेकिन अब एक बार फिर गुर्जर समुदाय के अभ्यर्थी को पांच प्रतिशत आरक्षण का लाभ देकर परिणाम तैयार करना पड़ेगा। इसी प्रकार विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में भी गुर्जर अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ मिल जाएगा। असल में हाईकोर्ट के आदेश के बाद गुर्जर समुदाय ने आंदोलन की धमकी देते हुए सरकार पर यह आरोप लगाया था कि कोर्ट में पैरवी प्रभावी तरीके से नहीं की गई।

राज्य सरकार को भी यह पता था कि गुर्जर समुदाय नाराज होगा। इस स्थिति को देखते हुए ही सरकार ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की। सरकार की इस याचिका पर ही 22 दिसम्बर को न्यायाधीश मनीष भंडारी ने 6 सप्ताह के लिए रोक के आदेश को स्थगित कर दिया है। न्यायाधीश भंडारी ने साफ कहा कि वे अपने पूर्व के आदेश पर रोक नहीं लगाएंगे। अब माना जा रहा है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील कर हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगवाने का प्रयास करेगी।

(एस.पी.मित्तल)

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