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राजस्थान सरकार ने एक बार फिर जनभावनाओं का सम्मान कर तथा जीवहित में अपनी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए काम किया है। पहले जहाँ वन विभाग ने मानसून के दौरान राज्य के टाइगर रिज़र्व को खुला रखने की बात कही थी, वहीँ अब जंतु एवं वन विशेषज्ञ कमिटी की राय जानने के बाद तथा आमजन की भावनाओं को समझकर सरकार ने अपना निर्णय वापस ले लिया। अब मानसून के दौरान राज्य के बाघ संरक्षित क्षेत्र नहीं खोले जाएंगे। राज्य के प्रमुख बाघ संरक्षित क्षेत्र  रणथंभौर टाइगर रिजर्व के एक से पांच जोन (मुख्य नेशनल पार्क) को मानसून के निर्धारित समय पूरे तीन महीने, एक जुलाई से 30 सितंबर तक बंद रखा जाएगा। जबकि पूर्व की भांति रणथम्भौर के 6 से 10 जोन यानी पर्यटक विचरण क्षेत्र को इस साल भी खुला रखा जायेगा।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने मानसून में टाइगर रिज़र्व खोलने को गलत बताया था:

पहले जब राज्य के वन विभाग ने इस वर्ष मानसून में टाइगर रिज़र्व खोले जाने की बात कही थी तब राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने वन विभाग को इसके खिलाफ नोटिस जारी कर दिया था। एनटीसीए के वन्यजीव विशेषज्ञों की दलीलों को सुन राजस्थान सरकार ने बाघों के हित में यह फैंसला किया कि मानसून में बाघ प्रजनन का प्रमुख मौसम होने के कारण इस समयांतराल में इन टाइगर रिज़र्व में इंसानी आवाजाही को प्रतिबंधित किया जायेगा। सरकार के मुताबिक दुनियाभर में बाघों की अच्छी-खासी संख्या के लिए प्रसिद्ध रणथम्भौर टाइगर रिज़र्व को जहाँ मानसून के तीन महीने तक पर्यटकों के लिए बंद रखा जायेगा वहीँ सरिस्का टाइगर रिजर्व के एक जोन को ही रोटेशन और परिस्थिति के अनुसार खोला जाएगा।

सभी के हित को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय:

राजस्थान सरकार के वन विभाग ने पहले यह अधिसूचना जारी की थी कि राज्य के टाइगर रिजर्व को पर्यटकों के लिए साल के 12 महीने खोला जाएगा। लेकिन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने बताया कि बारिश के समय बाघों का प्रजनन काल होता है। इस दौरान क्षेत्र में पर्यटकों की चहलकदमी से बाघों की निजता में हनन पड़ सकता है व इससे उनकी संख्या में कमी आ सकती है। इसके साथ ही प्रदेश के पूर्व वन अधिकारियों एवं वन्यजीव जानकारों ने भी एनटीसीए के मत का समर्थन किया था। इस बात को मद्देनज़र रखते हुए सरकार ने बारिश में 3  माह तक टाइगर रिज़र्व पार्क बंद रखने का निर्णय लिया है।

तो इसलिए खोलना चाह रहे थे:

पहले सालभर पार्क खोलने के पीछे राजस्थान सरकार की मंशा राज्य के विकास और आर्थिक हित के लिए समर्पित थी। सरकार ने सोचा था कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के कारण क्षेत्र का विकास होगा व प्रदेश के राजस्व में बढ़ोतरी होगी। वन विभाग के अनुसार जब देश के अन्य टाइगर रिज़र्व सालभर खुलें रह सकते है तो राजस्थान के क्यों नहीं? जबकि अन्य राज्यों में बारिश यहाँ से अधिक होती है। हालांकि वन्यजीव विशेषज्ञों की मानकर वन्यजीवन के हित में सरकार ने अपने इन प्रश्नों को स्वयं ही समाप्त कर दिया। इसके साथ ही सरकार ने यह दर्शाया कि लोकतंत्र में जनता का फैंसला ही अंतिम व सर्वमान्य होता है।

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