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राजस्थान सरकार ने प्रदेश के शहरी क्षेत्र के वंचितों को उनकी ज़मीन, आवास के पट्टे वितरण के लिए चलाये गए ”शहरी जनकल्याण शिविर” के अंतर्गत अब उन लोगों को राहत दी है जो एक ही मकान या जगह पर रहते है, लेकिन परिवार अलग होने की वजह से अपनी जगह के अलग हक़ की आवश्यकता होती है। अब स्टेट ग्रांट एक्ट के तहत उन लोगों के लिए भी अलग पट्टे जारी किये जायेंगे। इस सुविधा से उन परिवारों को विशेष फायदा होगा जो एक ही घर में रहते है। लेकिन एक से अधिक वारिस होने के कारण संयुक्त नहीं रह पाते।

300 वर्गमीटर तक के आवास या भू-खंड के लिए ज़ारी हो सकेंगे:

नगरीय विकास विभाग की और से जारी हुए आदेश के मुताबिक 300 वर्गमीटर तक के भू-खंड पर ही अलग-अलग पट्टे मिल पाएंगे। एक घर में परिवार के मुखिया के अलावा यदि उसके बालिग़ उत्तराधिकारी भी स्वतंत्र रूप से अपने परिवार में रहते हैं तो मुखिया की अनुमति से उत्तराधिकारी को उसके हिस्से का पट्टा जारी किया जा सकता है।

परिवार की सहमति के आधार पर दिए जायेंगे पट्टे:

सरकार की इस कार्ययोजना के अंतर्गत पट्टा लेने वाले प्रार्थी को पहले अपने हिस्से की जगह का कानूनी हक़ लेने के लिए अपने परिवारजनों की सहमति दर्शानी होगी। बिना भू स्वामी की अनुमति और परिवार की सहमति के अलग से पट्टा जारी नहीं होगा। इससे पारिवारिक रिश्तों और आपसी संबंधों में मज़बूती आएगी।

सरकार के इस निर्णय से पारिवारिक सम्बन्ध बने रहेंगे मज़बूत:

राजस्थान सरकार का यह निर्णय एक घर में रहने वाले अनेक परिवारों के पारिवारिक रिश्तों में पारदर्शिता लाएगा। ज़मीन-जायदाद के कारण होने वाले अनावश्यक विवाद नहीं होंगे। किसी व्यक्ति के दो या दो से अधिक उत्तराधिकारियों में लड़ाई नहीं होगी। क्योंकि सरकार की इस योजना द्वारा अपनी पूर्वनिर्धारित ज़मीन का पट्टा परिवारजनों की सहमति से बन जायेगा। परिवार के मुखिया के उत्तराधिकारी अपनी-अपनी जगह का कानूनी पट्टा बनाकर शांतिपूर्वक रह सकेंगे।

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