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राजस्थान का कुख़्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह तो कब का मारा गया। लेकिन अपराध के हिमायती बन रहे लोगों के दिमाग में बुराई का फितूर अभी भी ज़िंदा है। चूरू के मालासर में पुलिस की जवाबी कार्यवाही में मौत के हत्थे चढ़े आनंदपाल सिंह की ज़िंदगी तो वहीँ ख़त्म हो गई लेकिन उसकी कहानी अभी ज़ारी है। ज़ारी है एक अपराधी की मौत पर प्रदर्शनकारियों का प्रदर्शन और ईमानदार सरकार व कर्तव्यनिष्ठ पुलिस का विरोध। लेकिन एक सवाल, क्या यह जायज़ है?

आनंदपाल सिंह की मौत को दो सप्ताह के करीब बीत चुका है। लेकिन विपक्षी राजनेताओं और झूठी सांत्वना दिखाने वाले जाति-समाज के लोगों के कारण उसकी देह का अंतिम संस्कार अभी तक नहीं हो पाया है। आनंदपाल सिंह का शव अभी भी अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ है। सरकार ने आनंदपाल के परिजनों की मांगे मान ली है। कानूनी प्रक्रिया के तहत सरकार मामले में एसआईटी जांच कराने काे भी तैयार है। लेकिन आनंदपाल की मृत देह पर सियासत करने वालों के अनुसार अभी तक अंतिम संस्कार पर कोई निर्णय नहीं हुआ।

इन मांगों पर सहमत हुई सरकार:

राजस्थान सरकार और आनंदपाल की मौत पर सरकार का विरोध करने वाले प्रतिनिधियों के बीच शुक्रवार को प्रदेश गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के आवास पर बैठक हुई। इस बैठक में शामिल सरकार के प्रतिनिधियों ने आनंदपाल समर्थकों की चार प्रमुख मांगे मान ली।

  • आनंदपाल के भाई मंजीत को जमानत दिलाने पर सरकार तैयार हो गई है।
  • आनंदपाल की बेटी चीनू पर पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नहीं करने की मांग भी सरकार ने मान ली।
  • आनंदपाल सिंह की मौत पर हिंसक हुड़दंग करने वाले, प्रदर्शनकारी युवकों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने की बात भी सरकार ने मान ली।
  • आनंदपाल की जब्त प्रॉपर्टी को कानूनी प्रक्रिया के तहत लौटाने की मांग पर भी सरकार सहमत हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित नीतिनिर्देशों के अनुसार कार्यवाही कर रही है सरकार:

आनंदपाल की मौत पर सीबीआई जांच की मांग को लेकर सरकार ने सहमति व्यक्त नहीं की है। कारण है कि एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के मुताबिक़ इन मामलों में स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) द्वारा जांच प्रक्रिया हो सकती है। सरकार ने आनंदपाल सिंह मौत के मामले में भी एसआईटी गठित करने का प्रस्ताव राजपूत समाज के समक्ष रख दिया है। बावजूद इसके आनंदपाल समर्थक मृत देह का अंतिम संस्कार करने को राज़ी नहीं है।

प्रदेश में शांतिमय माहौल बनाये रखने के लिए सरकार ने मानी मांगें:

आनंदपाल की मौत के बाद से प्रदेश के कई हिस्सों में राजपूत समाज सड़को पर आ गया था। हिंसक प्रदर्शन द्वारा आमजन के रोज़मर्रा के कामकाज में बाधा उत्पन्न की गयी। प्रदेश का शांतिमय माहौल बेवज़ह बिगाड़ा गया। जातिवाद के नाम पर प्रदर्शन किया गया। प्रदेश के जनजीवन को इन हरकतों से कोई परेशानी न हो इसलिए सरकार ने लचीलापन दिखते हुए एक हद तक इन लोगों की मांगों को मान लिया।

आनंदपाल मामले पर वार्ता के लिए गृहमंत्री आवास पर आयोजित हुई बैठक में अस्वस्थ होने के कारण गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया शामिल नहीं हो सकें। इस बैठक में राजस्थान सरकार के प्रतिनिधियों में पंचायत राज मंत्री राजेन्द्र राठौड़, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी थे। आनंदपाल मौत पर प्रदर्शनकारियों के समर्थकों की ओर से राजपूत सभा अध्यक्ष गिरिराज सिंह लोटवाड़ा, महिपाल सिंह मकराना, करणी सेना के प्रवक्ता करण राठौड़, रावणा राजपूत सभा अध्यक्ष रणजीत सिंह सोढाला आदि इस वार्ता में शामिल हुए।

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