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राजस्थान के किसान वो किसान हो जो रेतीली मिट्टी में सोना उगाने का बेहतरीन काम करते है। इन किसानों की मेहनत, जिद और जज्बे ने राजस्थान का भूगोल ही बदल दिया है। रेगिस्तान की तपती रेत में इन्होने देशी-विदेश किस्म कि ऐसी फले लहलहा दी है जिसकी कल्पना कभी यहां के किसान ने नही की थी। राजस्थान के किसान आज ऑस्ट्रेलियाई तरिके से बैंगन तो कही सेब के आकार के बेर और कही धोरों में नामुकिन सेब की फसलें उगा रहे है। इतना ही नही राजस्थान के किसान इन धोरों में चाइनीज खीरा, ब्रोकली और मशरूप जैसी खेती भी कर रहे है। यहां के किसानों ने पॉली हाउस और फैन पैड जैसी नई तकनीकों के साथ साथ बरसाती पानी और ओस की बूंदों तक को सहेज कर खेती कर रहे है। इस दिशा में राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित किया गया ग्राम किसानों को लिए मील का पत्थर साबित हुआ है। आज ऑर्गेनिक तरीके से खेती कर रहे इन किसानों की फसल की मांग विदेशों में भी है।

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लाखों की नौकरी छोड़ कर रहे है खेती

झालावाड़ जैसे पथरीले जिले में जगदीश पाटीदार ने चंडीगढ़ की आईटी कंपनी से लाखों का पैकेज छोड़कर ऑस्ट्रेलियाई तकनीकी से खेती की और कुछ साल में ही देहात ऑर्गेनिक कंपनी बना दी। एमसीए के बावजूद पाटीदार थाई नींबू, ऑस्ट्रेलियन पपीते और ऑर्गेनिक खीरे का उत्पादन कर रहे हैं। पाटीदार की खेती इतनी चर्चित है कि वर्ल्ड बैंक की टीम भी उनके इस प्रयोग पर मुहर लगा चुकी है।

राजस्थान के इस गांव को बदला मिनी इजराइल में

जयपुर से 20 किमी दूर बालोलाई और बसेड़ी गांव मिनी इजरायल जैसा नजर आता है। किसान खेमाराम चौधरी ने 12 बीघा जमीन पर पॉली और फैन पैड हाउस बनाए हैं जिनसे सालाना 80 लाख रुपए तक की उपज लेते हैं। खेमाराम का नाम देश के उन किसानों में शुमार हैं जो फैन पैड तकनीक से खेती कर रहे हैं। इस तकनीक से खेत का तापमान 20-30 डिग्री तक स्थिर किया जा सकता है।

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बांरा में करौंदें ने बदली इस किसान की जिंदगी

बारां में आंवला और करौंदें के लहलहाते खेत देखकर एक बार किसी की भी नजर ठहर जाए। एक व्यक्ति की सोच कैसे पूरे इलाके में क्रांति सकती है, यह अंता के किसान प्रेम शंकर गालव ने साबित कर दिखाया। गालव ने केवल खुद की बल्कि अपने जैसे सैकड़ों किसानों की जिंदगी बदल दी। गालव दो हैक्टेयर में करौंदा के 200 पेड़ लगाकर सालाना 35 लाख रुपए तक कमा रहे हैं। लहसुन और अन्य फसल खराब हों इसके लिए गालव ने 250 क्विंटल क्षमता का एक स्टोरेज भी बनाया है। 2010 में उन्होंने प्रोसेसिंग यूनिट भी लगाई, जिसके जरिए ऑर्गेनिक जूस, कैंडी, सिरप और अचार तैयार कर रहे हैं।

बिना पानी इस महिला ने आजमाया अपना हौसला

पश्चिमी राजस्थान की बिमला चौधरी ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन वो राजस्थान की सबसे प्रगतिशील महिला किसान बनेंगी। चौधरी ने 15 बीघा खेत में बेर उगाना शुरू किया और इन्होंने सेब के आकार के बेर पैदा कर दिखाए हैं। इसके अलावा बिमला विदेशी मूल के ड्रेगन फ्रूट और पहाड़ी किस्म के राय बूंदी का भी उत्पादन कर रही हैं। राय बूंदी के पौधे पर उन्होंने ग्राफ्टिंग तकनीकी से लेहसुआ का उत्पादन शुरू किया है।

Source: bhaskar.com

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