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भारत के 13वें राष्ट्रपति के तौर पर प्रणब मुखर्जी ने कल रविवार को अपना कार्यकाल पूरा किया। राष्ट्रपति प्रणब को संसद के सेंट्रल हॉल में फेयरवेल दिया गया। इस मौके पर संसद के सेंट्रल हॉल में प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी, लाल कृष्ण आडवाणी, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, एनडीए के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार वेंकैया नायडू, पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह और एचडी देवेगौड़ा, सोनिया गांधी, गुलाम नबी आजाद, मुलायम सिंह, शरद यादव के अलावा संसद के अन्य सदस्य मौजूद रहे। विदाई समारोह के आयोजन के लिए नरेंद्र मोदी, सुमित्रा महाजन और हामिद अंसारी ने प्रणब मुखर्जी को रिसीव किया। इस विदाई समारोह के दौरान सभी सांसद और सत्ताधारी व विपक्षी दल के सभी प्रमुख नेता  सेंट्रल हॉल में मौजूद थे। अब प्रणब की जगह देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप मे रामनाथ कोविंद 25 जुलाई को पदभार ग्रहण करेंगे।

कहा मै नरेंद्र मोदी की एनर्जी का मुरीद:

अपने विदाई सम्बोधन में प्रणब मुखर्जी ने कहा, “इस शानदार प्रोग्राम के लिए पार्लियामेंट का शुक्रिया। मैं प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की एनर्जी का मुरीद हूँ। उनके साथ जुड़ी हुई अच्छी यादें लेकर जा रहा हूं। प्रधानमन्त्री मोदी ने बड़ी बेहतरी से काम किया है। प्रणब मुखर्जी ने कहा कि 1 जुलाई को लांच हुआ जीएसटी हमारे कोऑपरेटिव फेडरलिज्म (सहयोगी संघवाद) की एक शानदार मिसाल है। यह भारतीय संसद की परिपक्वता दर्शाता है।

एक नज़र प्रणब मुखर्जी के राजनैतिक जीवन पर:

प्रणब मुखर्जी कांग्रेस पार्टी के प्रतिबद्ध राजनेता रहे है। सत्ता का मोह न रखने वाले प्रणब 38 साल की उम्र में पहली बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। प्रणब करीब 43 साल तक संसद के सदस्य रहे। 22 साल तक प्रणब मंत्री पद पर रहे। 28 साल तक वे कांग्रेस वर्किंग कमेटी के मेंबर रहे। प्रणब 5 बार राज्यसभा के सांसद भी बने। प्रणब मुखर्जी को साल 2008 में देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मविभूषण दिया गया था।

  • प्रणब दा के रूप में जाने जाने वाले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को साल 1997 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार मिला था। प्रणब कहते थे कि पार्लियामेंट में डिबेट, डिसेंट और डिस्कशन होना चाहिए, लेकिन डिस्ट्रैक्शन नहीं होना चाहिए।
  • वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय, विदेश मंत्रालय जैसे अनेक विभागों की बागडौर प्रणब मुखर्जी ने अपने कार्यकाल के दौरान संभाली।
  • राष्ट्रपति पद पर अपने शानदार कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 32 दया याचिकाओं पर फैसला किया। इनमें से उन्होने अफजल गुरू, अजमल कसाब, याकूब मेमन समेत 28 दया याचिकाएं खारिज कर दी।

अपनी आत्मकथा का तीसरा भाग पूरा करेंगे प्रणब:

प्रणब ने भारतीय संविधान के प्रख्यात जानकार के तौर पर अपनी छवि बनाई है। राष्ट्रपति पद की गरिमा को प्रणब ने बड़े संजीदा तरीके से बनाए रखा है। भारतीय लोकतंत्र को मज़बूत करने की दिशा में प्रणब ने हमेशा काम किया है। प्रणब ने स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र का ध्यान रखते हुए इस बार चुनाव लड़ने से स्वयं मना कर दिया था।

अब राष्ट्रपति के पद से रिटायरमेंट के बाद प्रणब मुखर्जी पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय श्री एपीजे अब्दुल कलाम के 10 राजाजी मार्ग स्थित आवास पर रहेंगे। प्रणब अब फुर्सत के पलों में अपनी आत्मकथा की तीसरी बुक पूरी करना चाहते हैं। प्रणब की इच्छा है कि इसके बाद वो अध्यापन करे।

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