2 नवंबर को दिल्ली में पुलिस ने बेवजह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ नारे लगवाए। पूर्व सैनिक रामकिशन की खुदकुशी के मामले में कांगे्रस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल मृतक के परिजनों से मिलने गए तो उन्हें इंतजार करवाया गया। इंतजार की अवधि में कांग्रेस और आप के कार्यकर्ताओं ने नरेन्द्र मोदी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हालांकि बाद में इन दोनों नेताओं को मृतक के परिजनों से मिलवाया भी गया। दो नवंबर को जिस तरह हालात बिगड़े, उससे देश की राजधानी दिल्ली पुलिस की पोल खुल गई। ऐसा लगा कि दिल्ली पुलिस में कोई अक्लमंद अफसर है ही नहीं। सवाल उठता है कि जब राहुल गांधी राम मनोहर लोहिया अस्पताल और केजरीवाल लेडी हार्डिंग अस्पताल में मृतक के परिजनों से मिलने पहुंचे तो पुलिस ने रोका क्यों? राहुल अकेले ही अस्पताल के अंदर जाना चाहते थे, लेकिन इसके बावजूद भी मौजूद पुलिस अधिकारियों ने अंदर नहीं जाने दिया। दिल्ली पुलिस के अफसरों से यह पूछा जाना चाहिए आखिर राहुल गांधी को क्यों रोका गया? जितनी देर राहुल गांधी अस्पताल के बाहर खड़े रहे, उतनी देर कांग्रेस के कार्यकताओं ने मोदी के खिलाफ नारेबाजी की। मीडिया में यह प्रसारित हो गया कि राहुल गांधी को हिरासत में ले लिया गया है। इस मौके का कांग्रेस ने पूरा राजनीतिक फायदा उठाया। अहमद पटेल, गुलाम नबी आजाद, सी पी जोशी, आनंद शर्मा जैसे वरिष्ठ नेता हाथों हाथ राहुल के इर्द-गिर्द जमा हो गए। बाद में राहुल को मंदिर मार्ग वाले पुलिस स्टेशन में ले जाकर मृतक फौजी के परिजनों से मिलवाया गया। दिल्ली पुलिस ने जिस तरह परिजनों को थाने में बैठाए रखा, वह भी अविवेकपूर्ण निर्णय है। पुलिस उस समय तमाशा बन गई, जब राहुल गांधी के मंदिर मार्ग थाने का लाइव कवरेज भी चैनलों पर प्रसारित हो गया। राहुल ने थाने के अंदर ही एक इंस्पेक्टर को कहा- तुम्हें शर्म नहीं आती। राहुल को इस अंदाज में बोलने का अवसर भी दिल्ली पुलिस ने खुद दिया। जिस तरह से राहुल ने थाने के अंदर पुलिस को हड़काया, उससे पुलिस के बड़े अफसरों को शर्म महसूस करनी चाहिए। यदि आसानी के साथ राहुल को मृतक के परिजनों से मिलने दिया जाता तो कोई बवेला नहीं होता।
(एस.पी.मित्तल)

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