gogamedi

गैंगस्टर आनंदपाल की मौत के बाद उसके समर्थक पूरे प्रदेश के हालात बिगाड़ने में कोई कोर-कसर नही छोड़ रहे है। 5 दिन पहले मृतक आनंदपाल के गांव में राजपूत समाज ने कुछ नेताओं के आह्वान पर सांवराद में श्रद्धांजली सभी की थी जिसे बाद में उपद्रव के रूप में तब्दील कर दिया और आगजनी, फायरिंग, लूट, मारपीट जैसे कृत्यों को अंजाम दिया। राजपूत समाज अपनी आन, बान और शान को भूलकर एक अपराधी जो कि रावणा राजपूत समाज से वास्ता रखता था, के लिए खड़ा हो गया है। क्या अब राजपूतों के लिए ऐसा ही इतिहास बनाना बाकि था। सच्चाई और दूसरों की रक्षा के लिए अपने आप को कूर्बान करने वाले राजपूत ने क्या अपराधियों और गुंडों तक अपने आपको सीमित कर लिया है। आनंदपाल को न्याय दिलाने के लिए राजपूत समाज एक अपराधी सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के आह्वान पर 22 जुलाई को जयपुर की और कूच करेंगे। गोगामेड़ी नागौर और जयपुर पुलिस का वांधित अपराधी है जिसे पुलिस 20 मुकदमों में ढूंढ रही है। आनंदपाल जैसे अपराधियों का समाज के लिए होना कितना नुकसान देह था इसका अंदाजा लगाए बिना ही समाज उसके पक्ष में खड़ा हो गया और प्रदेश की शांति एवं कानून व्यवस्था को कब्जाने की तरकीबों में लगा हुआ है। नरपत सिंह राजवी, पूर्व राजपरिवार की राजमाता पद्मिनी देवी, गिर्राज सिंह लोटवाड़ा जैसे समाज का नेतृत्व करने वालें लोगों की बुद्धि को क्या हो गया है। क्या एक अपराधी के लिए न्याय मांगना ही इस समाज का उद्देश्य है। आखिर कब तक राजपूत ऐसे अपारधियों को अपनी कोख में पनपने देगा। ये ऐसे दानव है जो अपनों को ही समूल नष्ट करने में संकोच नही करते।

अपराधियों को संरक्षण देना राजपूत समाज को शोभा नही देता

राजमाता पद्मिनी देवी, नरपत सिंह राजवी, गिर्राज सिंह लोटवाड़ा जैसे गणमान्य लोग राजपूत समाज को नेतृत्व प्रदान करते है। आज से ही नही वर्षों से यही परंपरा चली आ रही है कि राजपूत समाज जनतादल यानी भारतीय जनता पार्टी के समर्थन में खड़ा रहता है, लेकिन एक अपराधी को उसके द्वारा किए गए कर्मों का फल मौते के रूप में मिलता है तो क्या यह समाज उस अपराधी के लिए न्याय मांगने लगे। आपराधिक गतिविधियों और आपराधिक प्रवृति के लोगों को संरक्षण देना राजपूत समाज को शोभा नही देता। आनंदपाल ही नही राजस्थान में राजपूतों के कई युवक आपराधिक कार्यों में लिप्त रहते है तो क्या सरकार और प्रशासन इस कार्य में उलझा रहे कि अपराधियों की सीबीआई जांच करता रहे। अपराधियों को अपराध करने से रोकना इस समाज और कौम का कार्य है ना कि अपराधियों को अपने आंचल में छुपाकर पालना।

राजपूतों ने नाम पर सेंक रहा है गोगामेड़ी अपनी रोंटियां

राजपूत समाज आगामी 22 जुलाई को राजधानी जयपुर की ओर कूच करने जा रहे है। इस कूच में राजपूत समाज का नेतृत्व एक अपराधी ही कर रहा है जिसका नाम है सुखदेव सिंह गोगामेड़ी। सुखदेव सिंह गोगामेड़ी राजपूतों का हितेशी बनता है लेकिन आखिर वह भी है तो एक अपराधी ही। इन अपराधियों को राजनैतिक दल फंड दे रहे है जिसके बदले ये लोग राजपूत समाज को उकसाकर रैलियां करवा रहे है लोगों को मरवा रहे है। गोगामेड़ी पर हत्या, लूट, दुष्कर्म जैसे कई मामले दर्ज है । सुखदेव सिंह के साथ ही एक और राजपूत नेता रणधीर सिंह गुढा भी है। गुढा भी राजस्थान में कुख्यात अपराधियों की श्रेणी में शामिल है औक दोनों को नागौर, जयपुर सहित कई थानों की पूलिस तलाश रही है। अब राजपूतों का नेतृत्व करने वाले इस शेरों को कोई बताएं की जो लोग अपराध करते है और पुलिस से छिपकर गीदड़ों की भांति भाग रहे है वे क्या राजपूत कौम का नेतृत्व करेंगे। और ऐसे नेतृत्व के साथ राजूपत कौम आती है तो फिर वह राजपूत नही होंगे वे राजपूतों शेरों के हरम और जनानखानों से निकली नस्लें है जिनको राजपूत कहलाने का कोई हक नही नही है।

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