राजस्थान विधानसभा में फिर छाया गाय का मुद्दा, सदन में जमकर चले ‘शब्दबाण’

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जयपुर। राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को एक बार फिर गाय पर सियासत गरमा गई। दोनों दलों के नेताओं ने जमकर हंगामा किया। इस दौरान बीजेपी विधायक मदन दिलावर और कांग्रेस विधायक गिर्राज मलिंग के बीच जोरदार बहस हो गई। दरअसल, सदन में विधायक शकुंतला रावत ने गैर सरकारी संकल्प के दौरान गाय के संरक्षण को लेकर संकल्प प्रस्तुत किया कि यह सदन सकंल्प करता है कि राज्य सरकार जनसहयोग से संचालित गौशालाओं के लिए जमीन, किसी भी किस्म की हो, उसका रजिस्ट्रेशन एवं रजिस्ट्री तहसील स्तर पर करने का प्रावधान करें। चर्चा के दौरान राव ने गाय की महिमा एवं उसके फायदे भी बताए।

शकुंतला रावत और मदन दिलावर के बीच हुई नोकझोंक
जब शकुंतला रावत बोल रही थीं तो भाजपा नेता मदन दिलावर ने उन्हें बीच में टोका तो शकुंतला रावत ने भी उन्हें कह दिया कि आप बार-बार क्यों बीच में फूदकते हो। क्या पिछले जन्म में चूहे थे। उन्होंने गाय की व्याख्या भी एक पूजनीय के तौर पर की। इस दौरान प्रतिपक्ष उपनेता राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि रावत ने गाय के बारे में बहुत अच्छी बात कही, लेकिन यहां तो गाय को जानवर तक कह दिया गया। इस पर पक्ष के सदस्यों ने कहा कि वीर सावरकर ने पुस्तक में यह कहा है, वह ही कहा गया है। इसके बाद पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच नोकझोंक एवं जोर जोर से बोलने से हंगामा शुरु हो गया।

गौचर में बनी गौशालाओं का पंजीकरण हो – राठौड़
संकल्प के दौरान राठौड़ ने पशुधन को देश के आर्थिक विकास का मेरुदंड बताते हुए कहा कि आज गौचर एवं औरण भूमि पर अतिक्रमण हो रहे है। उन्होंने सुझाव दिया कि गौचर और औरण भूमि का अभियान चलाकर सीमांकन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में 2,727 गौशालाएं है। उनमें 1,363 को अनुदान मिलता है। गौशालाओं के लिए अस्थाई भूमि का आवंटन भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गौचर में बनी गौशालाओं का तो पंजीकरण कर दिया जाना चाहिए। इस दौरान अन्य सदस्यों ने भी गाय के संरक्षण की बात कही।

शांति धारीवाल ने बताया था गाय को पूजना व्यर्थ
आपको बता दें कि संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने पिछले दिनों विधानसभा में वीर सावरकर की किताब के हवाले से हिंदुत्व की अलग अवधारणा दी थी। इस किताब में गाय को लाभदायक पशु तो बताया था, लेकिन उसे पूजे जाने में कोई सैंस नहीं बताया था। उन्होंने कहा था कि पूजा तो सुपर ह्यूूमन को जाता है, पशुओं को पूजना व्यर्थ है।

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