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किसानों को हक दिलवाने के लिए कांग्रेस द्वार किए जा रहे नाटक को किसान भी पहचान चुके है। जब घोड़े की खाल में हाथी वार करता है तो हिनहिनाना नही भूलता और वही उसकी कलई खुल जाती है। कांग्रेसी आपसी में हिनहिना रहे है और किसानों के लिए किए जा रहे धरने प्रदर्शनों में या तो कांग्रेस कार्यकर्ता या फिर जाब्ते में लगे पुलिस कर्मी ही नज़र आ रहे है। कांग्रेस की इस हिनहिनाहट का किसानों से कोई संबंध नही है इस बात का सबूत खुद प्रदेश के किसान दे रहे है। राजस्थान के किसान प्रदेश सरकार द्वारा किए गये योजनाबद्ध तरिकों से खुश है लेकिन कांग्रेस के आलाधिकारियों को यह रास नही आ रहा और किसानों को भड़काने के असफल कयास किए जा रहे है। आपकों बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने पहले ही किसान आंदोलन से दूरी बना ली है।

एक नजारा यह भी….

कांग्रेस की और से शुरु किए गए किसान प्रदर्शनों की हालात बदत्तर हो रही है। किसानों ने कांग्रेस के इस प्रयोजन में कोई रूची नही दिखाई है। कांग्रेस ने धरने-प्रदर्शन में किसानों का समर्थन नही मिलने से इन प्रदर्शनों को सांकेतिक धरनों का नाम दे रहे है। वास्तविकता यह है कि कांग्रेस के सभी अधिकारी मिलकर भी किसानों के नाम पर भीड़ जुटाने में असफल नजर आ रहे है। किसानों से ज्यादा धरना स्थलों पर कांग्रेसी या पुलिस कर्मि नजर आ रहे है। दो दिन पहले भी कांग्रेस ने ऐसे ही फ्लॉप शॉ किए थे । कांग्रेसी अपने नंबर बढ़ाने के लिए किसानों को अधिक से अधिक संख्या में लाने के लिए वादे कर रहे है लेकिन हकीकत यह है कि जहां 4000 किसानों का टारगेट सेट होता है वहां 400 किसान भी नही पहुंचते।

प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष से छीना माइक, रोका भाषण

झूंझूनु में किसानों के लिए कर्ज माफी सहित कई मुद्दों पर किसानों को एकत्रित कर प्रदर्शन करने वाले राजस्थान कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान को किसानों ने ही खूब खरीखोटी सुनाई। मंच पर भाषण देने पहुंचे पूर्व प्रदेशाध्यक्ष को किसान भाईयों ने बोलने तक नही दिया। किसानों ने चंद्रभान से माइक छीन लिया और उन्हे भाषण बीच में ही रोकना पड़ा। चंद्रभान के आह्वान पर आऐ किसानों का कहना था कि कांग्रेस ने खुद 10 साल में किसानों के लिए कुछ नही किया उल्टा किसानों पर आर्थिक भार डालने का ही काम किया था। किसान भाईयों ने चंद्रभान को खरी खोटी सुनाते हुए कहा कि कांग्रेस किसानों की हमदर्द बनती है लेकिन चुनाव के बाद किसानों के हाल चाल तक नही पूछते। ये नेता अभी किसानों के साथ बोलते हैं लेकिन मुख्यमंत्री राजे ने किसानों को कई योजनाओं से लाभ दिए है औऱ आगे भी इस सरकार ने किसानों ने उम्मीद जताई है।

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