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चुरू जिले के मालासर में हुई राजस्थान के कुख्यात अपराधी आनंदपाल सिंह को लेकर एक बार फिर बड़ा खुलासा हुआ है। आनंदपाल की एनकाउंटर नही हुआ बल्कि पुलिस पर फायरिंग करने के बाद आनंदपाल जवाबी कार्रवाई में मारा गया था। यह पुलिस के एक जवाने के खुद बताया है कि पुलिस आनंदपाल सिंह को मारने नही बल्कि उसे जिंदा पकड़ने के लिए गई थी। पुलिस कार्रवाई में शामिल कमांडों हनुमान सेंवदा ने एक वीडियों में आनंदपाल की मौत का आंखों देखा हाल बताया।

घर की महिलाओं ने किया झगड़ा, साथी सोहन सिंह के साथ घुसे घर में

क्युआरटी की टीम में कमांडों हनुमान ने बताया कि पुलिस ने गांव और उस घर की शिनाख्त की जहां गैंगस्टर आनंदपाल छुपा हुआ था। इसके बाद पुलिस ने घर श्रवण सिंह जहां आनंदपाल छुपा हुआ था उस घर के मुख्य दरवाजे पर दो पुलिस की गाडियां लगाई। प्रत्यक्षदर्शी हनुमान ने बताया कि पुलिस ने घर, दीवार, पेड़ आदि के सहारे मौके पर पोजिशन ले ली थी। इसके बाद वह, सोहन सिंह और दो कमांडो  ने घर के अंदर घुसने का प्रयास किया लेकिन घर की महिलाओं ने घर में नही घुसने दिया जिससे मौका देखकर आनंदपाल घर की छप पर जा पहुंचा। हमने घर की महिलाओं को समझाय़ा लेकिन महिलाओं ने हमारे साथ हाथापाई की। पुलिस के समझाने पर महिलाओं को घर के एक कमरें में बंद कर दिया गया। इस बीच मैं और साथी सोहन सिंह पहले माले पर पहुंच गए।

करीब 20 बार सरेंडर करने की दी चेतावनी

पहले माले पर पहुंचने के बाद आनंदपाल सिंह एक कमरें में था। हमने उसे करीब 15 से 20 बार कमरे से बाहर आकर सरेंडर करने की चेतावनी दी, लेकिन आनंदपाल ने फायर करना शुरू कर दिया। ऐसे में हमारी टीम पीछे हट गई। करीब 20 से 25 बार यही हुआ कि हमारी टीम ने आनंदपाल को चेतावनी दी लेकिन वो हर बार हमपर फायरिंग कर रहा था। सबसे आगे कमांडो सोहन सिंह था जो मामले को देखते हुए आगे बढ़ा और सीधे आनंदपाल के सामने जा पहुंचा।

Aanadpal Singh Encounter

जानिए कैसे हुआ आनंदपाल सिंह का एनकाउंटर… देखें और शेयर करें यह सच्चाई… #RajasthanKiSacchai #RajasthanTruth #AanadpalSingh

Posted by राजस्थान की सच्चाई on Wednesday, July 12, 2017

आनंदपाल ने किए 15 फायर, जिंदा पकड़ना था हमें

कमांडो हनुमान सेंवदा ने बताया कि हमने आनंदपाल को करीब 20 बार चेतावनी दी और कहा कि तुम्हे कोई गोली नही मारेगा, हम तुम्मे आराम से जयपुर ले जाएंगे लेकिन जब भी उससे कुछ कहा जाता वह फायरिंग करता। पहले 15 फायर तक तो हमने हमारी एके47 के कोक भी नही खोले थे। उन्होने बताया कि हम आनंदपाल को जिंदा पकड़ना चाहते थे लेकिन सोहन सिंह उसे पकड़ने के लिए जैसे ही आगे बढ़ा उसने उस पर फायर किया जिसमें सोहन घायल हो हया। सोहन मे भी आनंदपाल पर जवाबी फायर किया जिसमें आनंदपाल घायल हो गया और नीचे फर्श पर गिर गया। कमांडो हनुमान ने बताया कि वह घायल कमांडो सोहन को लेकर नीचे आ गया और रतनगढ़ सोहन के साथ चला गया था।

आमने सामने हुए आनंदपाल और कमांडो सोहन सिंह

सोहन सिंह के घायल होने पर कमांडो हनुमान उसे लेकर रतनगढ़ अस्पताल जा रहे थे तभी सोहन ने बताया कि उसने आनंदपाल को मार दिया है। इस सच्चाई से पता चलता है कि पुलिस और एसओजी आनंदपाल को मारने नही बल्कि उसे जिंदा पकड़ना चाहती थी। पुलिस पर फायरिंग करने बाद आनंदपाल पर क्युआरटी के कमांडो सोहन में क्रॉस फायरिंग कि जिसमें सोहन घायल हुआ और आनंदपाल मारा गया।

मौत के 18 दिन बाद भी आनंदपाल की नही हुई अंत्येष्टी

आनंदपाल की मौत को कुछ लोगों ने एनकाउंटर का नाम दे दिया। आज उसकी मौत के 18 दिन बाद भी लोग उसके नाम पर अपना काम चला रहे है। राजस्थान के राजपूतों को आनंदपाल के नाम पर विभाजित कर दिया है तथा गांवों में आनंदपाल के नाम पर रैलियां कर जनता को बरगलाने के काम लगे हुए है। आनंदपाल की मौत के बाद उसके लिए इंसांफ की पैरवी करने वाले ये लोग उस समय कहां थे जब वह हत्या, डकैती कर रहा था। कहीं ने कहीं आनंदपाल के परिवार को भी इन सबका दोषी मानना चाहिए जो अपने बेटे, बाप, और पती की मौत का सौदा कर चुके है।

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