Bet Bachao Yojana

बेटियों को बचाने के लिए राजस्थान सरकार द्वारा की जा रही कोशिशे अब कामयाब होने लगी हैं। बेटियों को बचाने की मुहिम अब रंग लाने लगी हैं। हाल ही में शोसल स्टडी में यह खुलासा हुआ है कि कोख में पल रही बेटियों को बचाने में राजस्थान में 14 फीसदी अंकों की बढ़त हासिल की हैं। राजस्थान में पिछले 6 माह में 11 हजार 323 बेटियों में पिछले साल के मुकाबले ज्यादा जन्म लिया हैं।

चिकित्सा विभाग की कोख में पलती बेटी को बचाने के लिए पीसीपीएनडीटी सैल के माध्यम से सख्ती से कार्रवाई और बेटियों को बचाने की केंद्र व राज्य सरकार की मुहिम अब कामयाब होने लगी हैं। एक सामाजिक संस्था की ओर से हुई स्टडी में यह खुलासा हुआ कि पिछले साल की तुलना में इस साल ज्यादा बच्चियों ने जन्म लिया हैं।  जानकारी के अनुसार साल के शुरुआती 6 महिलों में जन्मी बेटियों की संख्या का विश्लेषण करने पर कोख में पलती बटी को बचाने की मुहिम कारगर साबित होती दिखाई दे रही है ।

ऐसे बढ़ी प्रदेश में बेटियों की संख्या

राजस्थान  में 2016 में 6 माह में 7 लाख 10 हजार 817 बच्चों ने जन्म लिया हैं। इन बच्चों में 3 लाख 43 हजार 812 लड़कियों ने जन्म लिया हैं। जबकि 2015 के शुरु के 6 महीनों में 6 लाख 92 हजार 762 बच्चों में से 3 लाख 32 हजार 489 ही बच्चियों ने जन्म लिया था। ऐसे ही 2015 में जहां लिंगानुपात अप्रैल से सितंबर तक 923 था जो अब 937 हो गया हैं।

सख्ती दिखाने पर बढ़ी बेटियां

राजस्थान सरकार से चिकित्सा विभाग और पीसीपीएनडीटी सैल की ओऱ से जिन जिलों में डिकॉय ऑपरेशन कर कोख में लिंग जांच करने वाले सोनोग्राफी सेंटर्स पर कार्रवाई की वहां पर बेटियों की संख्या में बढोत्तरी हुई हैं। इन जिलों में सीकर, चूरु और झुंझुनू आते हैं। यहां पीसीपीएनडीटी की सैल में लिंग जांच करने वाले कई केंद्रों पर कार्रवाई कर आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया। नतीजतन सीकर में 42 और झुंझुनू में 50 फीसदी लिंगानुपात में वृद्धी हुई हैं।

वसुंधरा सरकार की इन योजनाओं से मिली बेटियों को बचाने में कामयाबी

राजस्थान सरकार प्रदेश में लगातार गिर रहे बेटियों के लिंगानुपात पर चिंता जाहिर करते हुए बेटियों को बचाने की कई योजनाएं बनाई। वसुंधरा सरकार ने प्रदेश के लोगों को जागरुक किया और पीसीपीएनडीटी सैल को ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने के खुले निर्देश दिए जो बेटियों के भ्रुण में ही लिंग जांच करवाते हैं। इसके चलते पीसीपीएनडीटी की सैल ने प्रदेश के कई हिस्सों में ऐसे केंद्रों पर कार्रवाई की जहां लिंग जांच होता हों ओर ऐसे लोगों को सलाखों के पीछे पहुंचाने का कार्य किया जो इन कार्यों में लिप्त हो। राजस्थान सरकार ने बेटियों को बचाने और उन्हे समाज, परिवार का अभिन्न हिस्सा बनाने कि लिए कई योजनाएं लागू की हैं। इन योजनाओं में राजश्री योजना, मुख्यमंत्री हमारी बेटी योजना, आपकी बेटी योजना, मुखबिर बेटी योजना, जीपीएस युक्त सोनोग्राफी मशीनों का प्रयोग आदि योजनाओं से बेटियों को बचाने में वसुंधरा सरकार को सहायता मिली हैं जिनके सकारात्मक परिणाम आज सभी के सामने हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा द्वारा जिन परिवारों में बेटियों का जन्म होता है उन्हे हस्ताक्षरित बधाई संदेश भेजे जाते हैं।

राजस्थान सरकार की राजश्री योजना

राजस्थान सरकार बेटियों को बचाने के लिए अपनी महत्वकांक्षी योजना राजश्री लागू की हैं।  राजश्री योजना के अंतर्गत सरकार बेटी के जन्म से लेकर 12वीं कक्षा तक अभिभावक को 6 चरणों में 50000 रुपयों की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अंतर्गत बेटी के जन्म पर  2500 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इसके बाद बेटी के पहले जन्मदिवस पर अभिभावक को फिर से 2500 रुपये दिए जाएंगे। बिटिया को राजकीय विद्यालय में प्रवेश दिलाने पर 4000 रुपयों का आर्थिक अनूदान दिय़ा जाएगा जिससे आपकी लाड़ों को बिना किसी आर्थिक परेशानी के स्कूली शिक्षा मिल सके।  इसी तरह प्रारंभिक शिक्षा से लेकर 12वी कक्षा तक बिटिया के अभिभावकों को अलग अलग धनराशि प्रदान की जाएगी। जैसे 6 कक्षा में प्रवेश लेने के बाद 5000 हजार रुपये, 10वी कक्षा में प्रवेश लेने पर अभिभावकों को 11000 रुपयों का आर्थिक अनुदान राजस्थान की यशस्वी मुख्यमंत्री श्रीमति वसुंधरा राजे जी द्वारा दिया जाएगा। अगर आपकी बेटी 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करती है तो प्रदेश सरकार द्वारा 25000 हजार रुपयों की सहायता राशी प्रदान की जाएगी।

 मुख्यमंत्री हमारी बेटी योजना

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने प्रदेश की बालिकाओं को उच्च शिक्षा और बेटियों में शिक्षा को  प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री हमारी बेटी योजना लागू की। इस योजना के अन्तर्गत मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे प्रदेश के प्रत्येक जिले से दो बेटियों के शिक्षा संबंधी खर्च वहन करेंगी। ये दो बीपीएल परिवार की बालिकाएं 10वीं कक्षा की होंगी जो जिले में माध्यमिक शिक्षा की परीक्षा में पहले ओर दूसरे नंबर पर रहेगी।  इस प्रकार पूरे प्रदेश से कुल 66 बच्चियों का खर्च मुख्यमंत्री द्वारा वहन किया जाना है। इस योजना से प्रदेश में बालिका शिक्षा के स्तर में सूधार होगा साथ ही गरीब तबके की कन्याओं को संबल मिलेगा।

आपणी बेटी योजना 

मुख्यमंत्री वसुधरा राजे ने प्रदेश में बेटियों को बचाने के लिए कई प्रयास किए हैं। इन प्रयासों में आपणी बेटी योजना भी प्रमुख हैं। इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश के सभी जिला अधिकारियों को गरीबी रेखा से जीवन यापन करने वाली दो बेटियों को गोद लेना होता है। इन बेटियों के शिक्षा सहित सभी क्षेत्रों का आर्थिक व्यय सरकार उठा रही हैं।

मुखबिर योजना

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बेटियों को बचाने के लिए पीसीपीएनडीटी अधिनयम के क्रियान्वयन को प्रभावी करने के लिए यह योजना बनाई हैं। इस योजना के अन्तर्गत जो लोग लिंग जांच अथवा भ्रुण जांच की पुख्ता जानकारी देते हैं व आरोपियों को प्रभावी रुप से पकडवाने में सहायता करते हो उन्हे राजस्थान सरकार 2 लाख रुपये का इनाम देकर प्रोत्साहित करती हैं। सरकार यह राशि तीन किश्तों में देती हैं।  इस योजना के द्वारा अब राजस्थान सरकार डिकॉय ऑपरेशन में सहायता करने वाली महिला और उसके सहयोगी को भी प्रोत्साहित राशि प्रदान करती हैं।

जीपीएस युक्त सोनोग्राफी मशीनों का उपयोग

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने प्रदेश में बेटियों को बचाने के लिए कई योजनाओं को लागू किया हैं।  राजस्थान में बेटियों की संख्या को बढाने के लिए अब जीपीएस ट्रेकिंग सिस्टम वाली सोनोग्राफी मशीनों का उपयोग किया जा रहा हैं। इन मशीनों को जीपीएस ट्रेकिंग सिस्टम से ट्रेक किया जा सकता हैं। अगर प्रदेश में कही भी लिंग परीक्षण की सूचना मिलती हैं तो पीसीपीएनडीटी की सैल सीधा कार्रवाई कर सकती हैं। इससे अपराधियों में भय का माहोल बना और बेटियों की संख्या में इजाफा हुआ।

आपकी बेटी योजना

राजस्थान सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना के अन्तर्गत जो बालिकाए गरीबी रेखा से नीचे हैं और जिनके माता-पिता जीवन यापन करने में असमर्थ है अथवा जिन बालिकाओं के माता-पिता की मृत्यु हो चुकी हैं उन्हे लाभांवित किया जा रहा हैं। योजना के अन्तर्गत कक्षा 1 से 8 तक अध्यनरत बच्चियों को 1100 रुपए एंव जो बालिकाए कक्षा 9 से 12 के बीच अध्यनरत है उन्हे 1500 रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही हैं।

 

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