Child Marriage in India

राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है। पिछले कुछ सालों से राजस्थान सरकार और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रयासों से यहां बेटियों की तादात में वृद्धि देखी गई है। राजस्थान को आधुनिक बनाने के लिए मुख्यमंत्री राजे ने कई अभिनव प्रयास किए है लेकिन प्रदेश में अभी भी बेटियों के माता-पिता उन्हे लेकर पूरी तरह फिक्रमंद नजर नही आ रहे है। आज भी प्रदेश की बेटियों को बाल विवाह जैसे अपवादों का दंश झेलना पड़ता है। राजस्थान सरकार के पूरे प्रयासों के बाद भी आज भी राजस्थान में बाल-विवाह के रूप में बेटियों की जिंदगी से खिलवाड़ बदस्तूर जारी है। इन सबके बावजूद प्रदेश में पिछले कुछ सालों में बाल-विवाह में अप्रत्याशित रुप से कमी देखी गई है। महिला एवं बाल विकास संगठन की माने तो राजस्थान में पिछले कुछ सालों में 50 फिसदी तक बाल-विवाह में गिरावट आंकि गई है।

child marriage in Rajasthan

                                 50 फीसदी तक की कमी आई बाल-विवाह में

आंकड़ों की मानें तो, जागरुकता का ही नतीजा है कि पिछले 5 वर्षों में प्रदेश में बाल विवाह में 50 फीसदी तक की कमी आई है। हालांकि इतने बड़े सुधार की गुजांइश राजस्थान में नही देखी जाती लेकिन राजस्थान सरकार के प्रयासों से यह आंकड़ा काफी बड़ा है, प्रदेश में अभी भी बाल विवाह का आंकड़ा अभी भी 35 प्रतिशत से अधिक है। बाल विवाह में आए ये सुधार राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे की रिपोर्ट में उजागर हुए।

                   वसुंधरा सरकार की इन योजनाओं से मिली बेटियों को बचाने में कामयाबी

राजस्थान सरकार प्रदेश में लगातार गिर रहे बेटियों के लिंगानुपात पर चिंता जाहिर करते हुए बेटियों को बचाने की कई योजनाएं बनाई। मुख्यमंत्री राजश्री योजना, आपणी बेटी योजना, मुख्यमंत्री हमारी बेटी योजना, मुखबीर योजना और आपकी बेटी योजना जैसी योजनाओं से बेटियों के भविष्य को संकट से उबारा जा रहा है। पीसीपीएनडीटी की सैल ने प्रदेश के कई हिस्सों में ऐसे केंद्रों पर कार्रवाई की जहां लिंग जांच होता हों ओर ऐसे लोगों को सलाखों के पीछे पहुंचाने का कार्य किया जो इन कार्यों में लिप्त हो। मुख्यमंत्री वसुंधरा द्वारा जिन परिवारों में बेटियों का जन्म होता है उन्हे हस्ताक्षरित बधाई संदेश भेजे जाते हैं।

                                              रंग लाई राजे सरकार की योजनाएं

बेटियों को बचाने के लिए राजस्थान सरकार द्वारा की जा रही कोशिश अब कामयाब होने लगी हैं। बेटियों को बचाने की मुहिम अब रंग लाने लगी हैं। हाल ही में शोसल स्टडी में यह खुलासा हुआ है कि कोख में पल रही बेटियों को बचाने में राजस्थान में 14 फीसदी अंकों की बढ़त हासिल की हैं। राजस्थान में पिछले 6 माह में 11 हजार 323 बेटियों में पिछले साल के मुकाबले ज्यादा जन्म लिया है।

                                        बाल विवाह रोकने के लिए चलाया जा रहा है कैंपेन

राजस्थान सरकार द्वारा बाल विवाह को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे है। इन अभियानों के तहत अगर महिला एवं बाल विकास संगठन को कही बाल -विवाह की सूचना मिलती है तो त्वरित कार्रवाई की जाती है। जो पुलिस को बाल विवाह की सूचना देता है उसका नाम गुप्त रखा जाता है। बाल विवाह में सबसे बड़ी गिरावट दर्जन होने का अहम पहलु राज्य सरकार के जागरुकता अभियान और शिक्षा है।

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