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देश भर में राष्ट्रपति चुनाव की हलचल चल रही है। जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष ने अपने अपने प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतार दिए है। भाजपा गठबंधन राजग ने पेशे से वकील और बिहार के सांसद रामनाथ कोविंद को अपना प्रत्याशी बनाया है वहीं कांग्रेस गठबंधित यूपीए ने पूर्व केंद्रीय एवं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को अपना राष्ट्रपति पद का दावेदार बनाया है। शुक्रवार को देश के प्रधानमंत्री, मंत्री, मुख्यमंत्रियों ने रामनाथ कोविंद को नामांकन दाखिल करने पर बधाई दी। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे शुक्रवार को दिल्ली के दौरे पर रही। इस मौके पर मुख्यमंत्री राजे ने राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद से मिलकर उन्हे बधाई दी और अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की।

कोविंद को दी नामांकन दाखिल करने पर बधाई

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने एनडीए समर्थित राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के नामांकन दाखिल करने पर उन्हे बधाई दी। रामनाथ कोविंद के नामांकन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्रीगण, एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, सांसद और विधायकगण मौजूद रहे। आपकों बता दे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुई एनडीए घटक दलों कि बैठक में बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुना गया था। रामनाथ कोविंद उत्तरप्रदेश के कानपुर के रहने वाले है।

देश के दूसरे दलित राष्ट्रपति होंगे कोविंद

एनडीए के राष्ट्रपति पद के दावेदार रामनाथ कोविंद उत्तरप्रदेश से भाजपा के दलित नेता के रूप में अपनी साख रखते है। कोविंद दो बार राज्य सभा के सांसद भी रह चुके है। कोविंद सरकारी वकील रहे है और 1971 में बार काउंसिल के लिए नामांकित हुए थे। कोविंद को केंद्रीय नेतृत्व में जिम्मेदारी भी दी जा रही थी लेकिन उन्होने अपने वकालत के पेशे को चुना। रामनाथ कोविंद दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में 16 साल तक वकालत कर चुके है। कोविंद अगर राष्ट्रपति चुने जाते है तो देश के दूसरे राष्ट्रपति होंगे जो दलित होंगे। इनके पहले के. आर. नारायणन दलित राष्ट्रपति बन चुके है।

सरकारी वकील रह चुके है कोविंद

एनडीए के राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद का जन्म पहले अक्टुबर 1945 को यूपी का कानपुर देहात में हुआ था। उन्होने बीकॉम कानपुर विश्वविद्यालय और कानून की पढ़ाई की ह । कोविंद दिल्ली हाईकोर्ट में 1977 से 1979 तक सरकारी वकील रहे थे। 1980 से 1993 तक केंद्र सरकार की स्टैंडिंग काउंसिल में रह चुके है।

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