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मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सोच, समझ और विजन की एक बार फिर चंहुओर प्रसंशा हो रही है। जिस प्रकार से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने विपक्ष द्वारा प्रदेश के हालात बिगाड़ने की कोशिशों को नाकाम किया है वो काबिल-ए-तारीफ है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सिद्ध कर दिया है कि प्रदेश के किसी भी व्यक्ति को आंदोलन या प्रदर्शन से नही बल्कि शांति और वार्ता से उसका हक दिया जाएगा। राज्य के गुर्जर आंदोलन फिर किसान आंदोलन और अब जाट आरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री राजे ने जो शानदार और साहसिक भूमिका निभाई है वो उत्साह वर्धक है। राजे का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के अधिकारों का हनन नही किया जाएगा बल्कि अधिकारों से ज्यादा राज्य सरकार द्वारा आम आदमी को दिया जाएगा जो कि सत्य प्रतीत हो रहा है। यह पंक्तियां वसुंधरा राजे की बढ़ाई में नही लिखी जा रही है बल्कि सुबे की मुखिया के लिए लिखी जा रही है जिन्हेने विपरीत परिस्थितियों में भी प्रदेश का हालात नही बिगड़ने दिए। हाल ही में जाट आरक्षण के मामले को मुख्यमंत्री ने अपनी रणनीतियों से समाप्त कर दिया है।

जाट आंदोलन हुआ समाप्त, खोले गए बंद रास्ते

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रयासों से राजस्थान के भरतपुर में पिछले 22 जून से ओबीसी में आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे जाट आंदोलन को जाट नेताओं ने समाप्त करने की घोषणा कर दी है। इसके बाद भरतपुर-धौलपुर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक नेम सिंह जिले में लगे सभी रेल और हाईवे मार्गों पर चक्का जामों को खुलवाने के लिए के लिए एलान कर दिया है।

सरकार से हुई वार्ता के बाद जाट नेताओं ने लिया आंदोलन वापस

आपकों बता दें कि शनिवार को जाट नेताओं और राजस्थान सरकार के अधिकारियों की बीच हुई वार्ता सफल होने के बात जाट नेताओं ने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया है। वार्ता होने के बाद दोनों पक्षों में सभी पहलुओं पर सहमति बनी। सरकार की तरफ से जाट आंदोलन कर रहे नेताओं को एक लिखित चिट्ठी सौंपी गई, जिसमें सरकार ने जाट नेताओं को वायदा किया है कि शीघ्र ही ओबीसी आयोग की सर्वे रिपोर्ट पर सरकार अध्यन कर आगामी विधानसभा की बैठक में आरक्षण के लिए प्रस्ताव पारित कर आरक्षण की प्रक्रिया को पूरा करेगी।

सड़क और रेल मार्ग को जाय समाज ने किया था बाधित

आपकों बतादें कि शुक्रवार से जाट समाज के लोग धौलपुर और भरतपुर में अन्य पिछड़ा वर्ग में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे रहे थे। इस समुदाय के लोगों ने सड़क मार्ग पर एक दर्जन से अधिक स्थानों पर जाम लगा रखा था। ऐसे में रास्ते में फंसे वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से निकाला जा रहा था। इसके अलावा रेलवे सेवाएं भी बाधित थीं। जाटों ने पटरियों पर कब्जा कर रखा था, जिसके चलते कई ट्रेनें रद्द कर दी गई थीं।

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