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देश के आंतरिक सुरक्षाबलों की अग्रिम पंक्ति में शामिल सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फाॅर्स (सीआरपीएफ) के कमांडेंट और वीरभूमि राजस्थान के बेटे, कोटा के रहने वाले चेतन चीता को भारत सरकार द्वारा शांतिकालीन वीरता के सर्वोच्च पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया जा सकता है। सरकार द्वारा हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर देश के जांबाज़ों को दिए जाने वाले सम्मान के लिए सीआरपीएफ ने चेतन का नाम अशोक चक्र के लिए भेजा है।

गौरतलब है कि चेतन चीता इसी साल 14 फरवरी को कर्नाटक राज्य के बांदीपुरा में आतंकियों से हुई मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस मुठभेड़ में आतंकियों ने कमांडेंट चेतन चीता को घेरकर उनपर पर 30 गोलियां दागी। इनमें से चेतन के शरीर के अलग-अलग हिस्सों में कुल 9 गोलियां लगी थीं। आतंकियों की 9 गोलियों के शरीर के भीतर तक धंस जाने के बाद भी चेतन ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने आतंकियों पर 16 राउंड फ़ायर किए। अप्रतिम बहादुरी दिखाते हुए चेतन ने एक आतंकी को वहीँ मार गिराया।

45 दिन बाद कोमा से बाहर आये:

आतंकियों की 9 गोलियां लगने के बाद चेतन घायल हो गए थे। लेकिन भारत के इस सपूत के हौंसले बुलंद रहे। इसके बाद साथी जवानों ने मोर्चा संभालते हुए चेतन को पास ही के श्री नगर के सेना अस्पताल में तुरंत राहत के लिए भेजा। बाद में एयर एंबुलेंस के जरिए चेतन को श्रीनगर के सेना अस्पताल से दिल्ली एम्स अस्पताल लाया गया। एम्स में चेतन को ट्रोमा सेंटर में रखा गया था। पूरा शरीर चलनी होने के कारण चेतन कोमा में चले गए थे। ज़िन्दगी और मौत की इस विकत जंग को जीतते हुए यह चीता 45 दिन कोमा में रहने के बाद होश में आया। 45 दिन के लम्बे समय तक कोमा में मरणासन्न सदृश अवस्था में रहने के बाद चेतन जिंदगी की जंग जीत गए। आतंकियों को मुहतोड़ जवाब देकर मौत के मुँह से बाहर निकलने वाले चेतन आज अपने घर पर है।

प्रधानमन्त्री मोदी सहित देशभर ने भी मांगी थी दुआएं:

चेतन के गंभीर घायल होने की जैसे ही खबर चलने लगी पूरे देश ने अपने हाथ चेतन की सलामती के लिए दुआओं में उठा लिए। देश का हर सर चेतन की खैरियत के लिए सज़दे में झुक गया। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चेतन के स्वास्थ्य लाभ की दुआ मांगी। देशभर में लोगों ने उनकी सेहत के लिए हवन-पूजन और प्रार्थनाएं कीं।

शांतिकालीन वीरता का सर्वोच्च सम्मान है, अशोक चक्र:

अशोक चक्र देश में असाधारण वीरता के लिए प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। देश में शांतिकालीन परिस्थितियों में आत्मबलिदान या अप्रतिम वीरता के लिए दिया जाने वाला यह सम्मान परमवीर चक्र के समान है। युद्धक्षेत्र से अलग देश में अद्भुत साहस और शौर्य प्रदर्शन पर यह सम्मान दिया जाता है। चेतन के पिता रामगोपाल बताते है कि बेटे की बहादुरी से उनका मस्तक ऊंचा हो गया है।

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