राजस्थान के राज्य पशु ऊंट को अब उसका असल हक मिल गया है। 12 साल रिसर्च के बाद फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने ऊंटनी के दूध को सेहत के लिए पूरी तरह फायदेमंद करार दिया है। सेंटर की क्लियरेंस के बाद अब देश के साथ ही इंटरनेशनल मार्केट में दूध की ट्रेडिंग का रास्ता साफ हो गया है। प्रदेश के लाखों पशुपालकों की किस्मत भी चमकेगी।

ऊंटनी क दूध इंसान के स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक

देशभर में फिलहाल चार लाख ऊंट हैं। इसमें से साढ़े तीन लाख ऊंट अकेले राजस्थान में हैं। केंद्र और राज्य सरकार की चिंता के बीच अब एफएसएसएआई ने ऊंटनी के दूध को इंसान के स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक बताया है। सेहत गड़बड़ाने की आशंका से अब तक ज्यादातर लोग इसके इस्तेमाल से परहेज करते रहे हैं। मानव जीवन के लिए उपयोग एवं खाने में आने वाली चीजों को देश की श्रेष्ठ प्रामाणिक संस्था एफएसएसएआई लंबे रिसर्च और मापदंडों पर खरा उतरने पर अधिकृत रूप से मुहर लगाती है। बड़े पैमाने पर व्यापार शुरू होने से दूध की देश-विदेश में मांग भी तेजी के साथ बढ़ने की उम्मीद है।

ऊंट विकास योजना से हो रहे है संरक्षण के कार्य

ऊंटों की विलुप्ती का कारण प्रदेश में जंगलों की कमी और खुला भाग कम होना हैं। राजस्थान पहले ऊंटों का बहुत बड़ा पालक रहा है लेकिन अब चुंकि ऊटों की संख्या में गिरावट आ रही हैं तो ऊंट पालतों की संख्या में दिनोंदिन गिरावट आ रही हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने हाल ही में ऊंट को संरक्षित पशु घोषित किया हैं। अब राज्य सरकार ने ऊंटों के संरक्षण के लिए अलग से विकास योजना शुरु की हैं। इस योजना के तहत राजे सरकार ऊंटो पालकों को तीन किश्तों में प्रोत्साहन राशि दी जा रही हैं। राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली इस राशि से ऊंट पालक ऊंट के नर और मादा बच्चों के पालन पोषण में काम में ले सकेगा।

ऊंट राजकीय पशु घोषित
वसुंधरा सरकार ने ऊंटों की कमी को देखते हुए रेगिस्तान के जहाज कहलाने वाले ऊंट को राजकीय पशु घोषित किया हैं। ऊंटों के संरक्षण करने, वध और इनकी तस्करी पर रोक लगाने के लिए राजस्थान ऊष्ट्रवंशीय पशु वध एवं प्रतिषेध और अस्थायी प्रव्रजन एवं निर्यात का विनियमन अधिनियम 2014 बनाई हैं जिससे ऊंटों के पलायन एवं तस्करी पर रोक लगेगी।

 ऊंटों की संख्य़ा में लगातार रही है गिरावट

राजस्थान ऊंटों के मामले में अग्रणी था लेकिन वर्तमान परिस्थितियां को देखे तो प्रदेश में खुला और वन क्षेत्र कम होने से ऊंटों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही हैं। इस गिरावट के चलते ऊंटों के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा हैं। राजस्थान सरकार इस प्रजाति को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। ऊंटों को बचाने के लिए राजे सरकार ने ऊंट विकास योजना शुरु की हैं। इस योजना का लाभ उठाने के लिए ऊंटपालकों को नजदीकी पशु चिकित्सालय में पंजियन कराना होगा।

पंजियन ऊंट पालकों को दे रही हैं राजे सरकार प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे प्रदेश के ऊंट पालकों को प्रोत्साहन दे रही हैं जिससे ऊंट पालकों द्वारा ऊंटों को बेचने और वध करने जैसे कार्यों में कमी आए। राजस्थान सरकार ऊंट पालकों को ऊंटों को रखने के लिए ऊंट विकास योजना के तहत लाभ दे रही हैं। ऊंट के नर या मादा बच्चे के एक माह के होने पर राज्य सरकार द्वारा प्रथम किश्त के तौर पर 3000 रुपए  दिए जाने स्वीकृत हैं। ऊंट के बच्चे के नौ माह के हो जाने पर 3 हजार व 18 माह का हो जाने पर 4000 रुपए देय हैं। ऊंट पालक को कुल तीन किश्तो में राजस्थान सरकार की ओर से 10000 रुपए देय हैं। राजस्थान सरकार का यह लाभ जिले के मूल निवासी को हि दिया जाएगा। इसके अलावा यह लाभ ऊंट के एक से ज्यादा बच्चे होने पर भी देय हैं। इस योजना का लाभ अक्टुबर-2016 के बाद पैदा हुए नर व मादा बच्चों को दिया जा रहा हैं। यह लाभ सार वर्ष तक लिया जा सकेगा। राजस्थान में इस समय ऊंटों की संख्या तीन लाख 32 हजार 712 हैं।

12 साल, सैकड़ों सैंपल, कई साइंटिस्ट, आखिरकार जीत

राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र बीकानेर से ऊंट की हर नस्ल से एक के बाद एक सैकड़ों सैंपल फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथॉरिटी को भेजे गए। यह सिलसिला12 साल से चल रहा है। कई साइंटिस्ट यहां से वहां और वहां से यहां आते रहे। विदेशी एक्सपर्ट भी इस प्रकिया में शामिल रहे। दूध अलग-अलग पैरामीटर्स पर परखा गया। 3 फीसदी फेट, 4-5 फीसदी प्रोटीन, क्षार सहित तय मापदंडों पर अब यह फूल-प्रूफ है। साइंटिस्ट का मानना है कि ऊंटनी का दूध इंसानों की सेहत के लिए गजब का फायदेमंद है। पीलिया, फेटी लीवर, ड्राप्सी, एड्स जैसी खतरनाक बीमारी में यह भी यह इम्यूनो सिस्टम को मजबूत बनाए रखने में काफी कारगर है।

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