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राजस्थान के किसी भी नागरिक को आर्थिक तंगी के अभाव में अपनी बीमारी से संघर्ष नही करना पड़े इसके लिए राज्य सरकार ने भामाशाह स्वास्थय बीमा योजना शुरु की है। इस योजना के माध्यम से गरीब परिवारों को निजी चिकित्सालयों में निशुल्क व गुणवत्तायुक्त इलाज मिल रहा है। योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को प्रतिवर्ष सामान्य बीमारियों के लिए 30 हजार रुपये का बीमा व चिन्हित गंभीर बीमारियों हेतु 3 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा मिल रहा हैं। सामान्य बीमारियों के 1 हजार 45 पैकेज व क्रिटिकल बीमारियों के 500 पैकेज तैयार करने के साथ ही राजकीय अस्पतालों और निजी अस्पतालों के लिए आरक्षित 173 पैकेज निर्धारित किये गये हैं। राज्य सरकार ने अब इस पैकेज को बढ़ाया है। मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में 300 से अधिक नए पैकेज शामिल करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए है। राज्य सरकार की इस योजना से जिन लोगों को राहत मिली है वे अपनी दास्तां यहां बयां कर रहे है। आईये जानते है कुछ उन लोगों की सफलता की कहानियां जिनके लिए राजे सरकार की भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना किसी वरदान से कम नही हैं।

भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना से 70 वर्षीय वृद्धा को मिला सहारा

श्रीगंगानगर जिले के गांव 5 केएसडी की 70 वर्षिय सरबती देवी के पैर की हड्डी टूट जाने से वह पूरी तरह असहाय बन गयी थी। सरबती देवी की मुश्किल घड़ी में गांव के एक युवा ने ई-मित्र पर जाकर भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े चिकित्सालयों की सूची निकाली और श्रीगंगानगर मुख्यालय पर अस्थि रोग विशेषज्ञ एवं भामाशाह योजना से जुड़े राजोतियां चिकित्सालय की जानकारी दी। परिवार के सदस्य ने भामाशाह कार्ड लेकर डॉ. सुभाष राजोतियां के पास पहुंचे। उन्होंने सरबती देवी का पंजीयन कर उसका उपचार प्रारंभ किया। सरबती देवी के पैर की हड्डी ऑपरेशन कर जोड़ने का खर्च 20 से 30 हजार रुपये तक था। भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के माध्यम से सरबती देवी का निशुल्क उपचार किया गया।

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13 साल की तानिया को मिला जीवनदान

श्रीगंगानगर जिले के ही जलोकी गांव में दिहाड़ी मजदूरी कर अपना पेट पालने वाले बग्गाराम की 13 वर्षीय पुत्री राजकीय विद्यालय जलोकी में 7वीं कक्षा की छात्रा है। तानिया के 8 वर्ष पहले हाथ की हड्डी टूट जाने से वह अपंग हो गयी थी। बग्गाराम ने हड्डी रोग विशेषज्ञों से राय ली तो चिकित्सों ने लगभग 40 से 50 हजार रुपये तक का खर्च बताया।  बग्गाराम को पता चला कि राजस्थान की जनकल्याणकारी सरकार ने गरीबों के लिये भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की है। बग्गाराम ने श्रीगंगानगर जिले में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सुभाष राजोतिया से संपर्क किया। चिकित्सक ने भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में पंजीयन कर तानिया के बायें हाथ की हड्डी को काटकर उपचार किया। उपचार के बाद तानिया लगभग स्वस्थ है तथा जल्द ही वह आगामी सत्र में फिर से स्कूल जाने लगेगी तथा अपने सपनों को साकार कर सकेगी।

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उदयराम को मिला बेहतर इलाज का सुकून

राजसमन्द जिले के प्रतापपुरा गांव का 34 वर्षीय उदयराम भी उन भाग्यशाली लोगों में शामिल है जिसे भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना ने तन्दुरुस्त कर दिया है। उदयराम का दिसम्बर-2016 में एक्सीडेंट हो जाने पर महाराणा भूपाल अस्पताल उदयपुर ले गए, जहाँ उसके पैर में रोड डाली गई। उदयराम की एलिजारोव फिक्सेशन बीमारी का इलाज किया गया। यहाँ से उसे जयपुर सिविल हॉस्पिटल भेजा जहां पैर की हड्डी का ऑपरेशन कर टाँके लगाए गए और घर भेज दिया गया। ऑपरेशन के 20 दिन बाद उसे वापस बुलाया था लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से उदयराम नहीं जा पाया। आराम नहीं होने पर उदयराम ने कांकरोली में शर्मा हॉस्पिटल जाकर डॉ. अनिल शर्मा को दिखाया। वहां से उन्हें शर्मा मल्टीस्पेश्यलिटी हॉस्पिटल उदयपुर भेजा गया, जहाँ डॉ. सूर्यकान्त पुरोहित ने उसका ऑपरेशन किया। इलाज के बाद अब उदयराम को आराम है। उदयराम का सारा इलाज भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में किया गया।

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भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना ने सँवार दी गीता की जिन्दगी

राजसमन्द जिले की देवगढ़ तहसील के तेलीखेड़ा गांव की रहने वाली 45 वर्षीया गीता देवी वैष्णव ऐसी मरीज हैं जिन्हें भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना ने राहत दी है।  उन्हें ‘एम्प्युटेशन एबोव नी’ की बीमारी थी। गीता देवी को कांकरोली स्थित शर्मा हॉस्पिटल में ले आए जहाँ मरीज की हालत देखकर डॉक्टर ने बोला कि ऑपरेशन कर पैर काटना पड़ेगा। इस पर शंकरदास सोच में डूब गए। इस अन्यमनस्क अवस्था में वे गीता को शर्मा हॉस्पिटल कांकरोली से गीतांजलि हॉस्पिटल उदयपुर ले आए व दिन भर्ती करा दिया। यहाँ उन्हें बताया गया कि 2-4 दिन भर्ती रखना पड़ेगा।

इस अस्पताल में भी दर्द में कोई सुधार नहीं होने पर वहाँ से अहमदाबाद ले गए और सिविल हॉस्पिटल में दिखाया। वहाँ कहा गया कि ऑपरेशन होकर पैर कटेगा और इसके लिए 2-4 दिन भर्ती रखना पड़ेगा। लेकिन शंकरदास ने अकेले होने के कारण वहां मना कर दिया और लौट कर शर्मा हॉस्पिटल उदयपुर लाकर गीता को भर्ती करा दिया। यहाँ भी उन्हें ऑपरेशन की बात ही कही गई। बात जब ईलाज के पैसों की आयी तो उन्हें बताया गया कि राजस्थान सरकार की भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में यह सारा काम निःशुल्क होगा और उन्हें कोई पैसा नहीं देना पड़ेगा।

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