बुधवार को राजधानी जयपुर में एक नया महापौर मिला हैं। निर्मल नाहटा के इस्तीफे के बाद भाजपा के प्रवक्ता का प्रमोशन कर वार्ड 43 से पार्षद अशोक लाहोटी को जयपुर की कमान सौंपी हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मोहर लगने के बाद अशोक लाहोटी ने नामांकन किया और 64 के मुकाबले 69 वोटों से जीत हासिल कर नये मेयर के रुप में शपथ ग्रहण की।

भाजपा के 64 पार्षद होने के बावजूद उन्हें इससे ज्यादा वोट मिले। लाहोटी को 69 और निर्दलीय प्रत्याशी सुशील शर्मा को केवल 21 वोट मिले। इस दौरान बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी, जयपुर शहर सांसद रामचरण बोहरा समेत कई विधायक और बीजेपी के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ही अशोक लाहोटी का नाम तय किया था। लाहोटी का नाम 2018 विधानसभा चुनाव को देखते हुए तय किया गया है क्योंकि लाहोटी युवा वर्ग में खासे लोकप्रिय हैं।

तीन दिन पहले बने थे भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता

आपको बता दें कि तीन दिन पहले ही अशोक लाहोटी ने भाजपा प्रदेश प्रवक्ता को तौर पर चुने गये थे। लाहोटी जयपुर के 9वें महापौर हैं और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी की पसन्द भी हैं।

निजी कारणों से नाहटा ने दिया इस्तीफा, लाहोटी एकमात्र विकल्प

गौरतलब है कि मंगलवार को निर्मल नाहटा ने निजी कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। नाहटा ने अपना इस्तीफा स्वायत्तशासी स्थानीय निकाय (डीएलबी) के निदेशक पवन अरोड़ा को सौंपा था। पूर्व मेयर नोहटा ने निजी कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था और उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया था। नाहटा के इस्तीफा देने के बाद प्रदेश भाजपा प्रमुख अशोक परनामी ने पार्टी के पाषर्दों के साथ एक बैठक की और इन चुनावों के लिए उन्हें आवश्यक निर्देश दिए थे। जयपुर के नए मेयर के लिए चुनाव होंगे, इसी के चलते जयपुर के एक होटल में भाजपा पार्षदों की बाड़ेबंदी की गई थी।

लाहोटी की जीत से भाजपा के युवा खेमें में खुशी की लहर

लाहोटी की जीत के साथ ही भाजपा खेमे में खुशी की लहर है। नगर निगम मुख्यालय पर लाहोटी हजारों समर्थकों की भीड़ के साथ पहुंचे जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया। जीत के बाद लाहोटी को बोर्ड सभा कक्ष में पद की शपथ दिलाई गई। इस मौके पर भाजपा के कई विधायक और बड़े नेतागण मौजूद रहे।

छात्र राजनीति से किया भाजपा की मुख्यधारा में प्रवेश

छात्र राजनीति से आये लाहौटी भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के अध्यक्ष बनने के साथ हाल ही में पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता बनाये गए थे। हालांकि वर्ष 2008 में हुए चुनाव में वह जयपुर के सिविल लाईन्स विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी प्रताप भसह खाचरियावास से चुनाव हार गये थे।

इस बार प्रदेश में वसुंधरा राजे सरकार आने के बाद महापौर का सीधा निर्वाचन का पिछली सरकार का फैसला बदलते हुए निर्मल नाहटा को महापौर बनाया गया था ,लेकिन कार्यकाल संतोषप्रद नहीं होने से दो वर्ष में ही उन्हें पद छोडऩा पड़ा।

कैसे बने लाहोटी मेयर…

इससे पहले मंगलवार को ही निर्मल नाहटा ने हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद मेयर के पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके तुरंत बाद ही लॉबिंग और बाड़ाबंदी का दौर शुरू हो गया था। लाहोटी के शपथ लेने के दौरान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, जयपुर के पहले महापौर व विधायक मोहनलाल गुप्ता व मंगलवार को ही महापौर पद से इस्तीफा देने वाले निर्मल नाहटा भी मौजूद थे।

मेयर बनने के बाद पहली बार क्या कहा लाहोटी ने

  • शहर की जनता का सपना पूरा करेंगे। वही हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
  • विभिन्न समितियों के चेयरमैन के बारे निर्णय के लिए पार्टी के सभी लोग बैठेंगे। कार्यकर्ता, पार्षद, विधायक, संगठन के पदाधिकारी सभी बैठकर निर्णय करेंगे।

ये है संख्या बल का गणित

  • जयपुर नगर निगम में 91 वार्ड हैं। ऐसे में 91 पार्षदों में से भाजपा के 64, कांग्रेस के केवल 19 और 8 निर्दलीय पार्षद हैं।
  • यानी भाजपा के 64 के अलावा 27 पार्षद सुशील शर्मा को वोट दे सकते थे।
  • लेकिन सुशील शर्मा को केवल 21 पार्षदों ने ही वोट दिया। जबकि सभी पार्षदों ने वोट दिया था।

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