भारत की विभिन्न कार्ययोजनाओं और कार्यप्रणालियों का निर्धारण करने वाले नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया यानी नीति आयोग (पूर्व नाम- योजना आयोग) के पहले उपाध्यक्ष अरविन्द पनगढ़िया ने कल मंगलवार को अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। अरविन्द पनगढ़िया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पसंदीदा अर्थशास्त्रियों में से एक माने जाते हैं। अपने इस्तीफे के बाद पनगढ़िया ने कहा कि वे दोबारा शैक्षणिक क्षेत्र में जाना चाहते हैं। पनगढ़िया इस अहम पद से इस्तीफे देने की चाहे लाख वजह बताए लेकिन उनके अचानक दिए गए इस्तीफे से यह स्पष्ट है कि सरकार और उनके कुछ मामलों पर मतभेद रहे होंगे। इससे पहले देश के प्रमुख अर्थशास्त्री और रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी अपने दूसरे कार्यकाल की ज़िम्मेदारी निभाने से मना कर दिया था। राजन भी इसके बाद फिर से अकादमिक जगत में लौट गए हैं। अभी वर्तमान में राजन अमेरिका के शिकागों यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर है।

नीति आयोग के सुझाव पर हुआ था विवाद:

अभी कुछ दिनों पहले नीति आयोग ने एक सुझाव दिया था जिसके अनुसार देश के अमीर किसानों पर आयकर लगाने की बात थी। आयोग के इस सुझाव पर विवाद हो गया था। विपक्षियों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की योजना बना ली थी। लेकिन बाद में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि कृषि या किसानों पर कर नहीं लगाया जाएगा। गौरतलब है कि साल 2024 से लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का निर्णय भी पनगढ़िया के नेतृत्व में नीति आयोग ने लिया है।

पनगढ़िया ने बताया यह कारण:

मूलतः राजस्थान के निवासी अरविन्द पनगढिय़ा ने अपने नीति आयोग के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने का कारण यह बताया कि मै कोलंबिया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हूँ। वहां से अवकाश लेकर मैने आयोग की ज़िम्मेदारी संभाली थी। लेकिन अब कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने छुट्टी बढ़ाने से मना कर दिया है। पनगढ़िया ने बताया कि इस स्थिति में मै यदि आयोग में अपनी ज़िम्मेदारी निभाता रहता तो मुझे यूनिवर्सिटी प्रोफ़ेसर के पद से हटा सकती थी। चूंकि यूनिवर्सिटी में मेरा कार्यकाल जीवनपर्यन्त है। इसलिए मै अब फिर से शैक्षणिक क्षेत्र में लौटूंगा।

 करीब से जानिए अरविंद पनगढिय़ा को:

देश के जाने-माने अर्थशास्त्री अरविंद पानगढिय़ा का जन्म 30 सितंबर 1952 काे राजस्थान में हुआ था। अरविंद ने अपनी कॉलेज की पढ़ाई अमेरिका स्थित प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी से की थी। पनगढ़िया एशियन डेवलपमेंट बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री भी रह चुके हैं। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई.एम.एफ.) और विश्व व्यापार संगठन जैसे संस्थानों के साथ भी पनगढ़िया जुड़े रहे हैं। नीति आयोग में उपाध्यक्ष की ज़िम्मेदारी ग्रहण करने से पहले पनगढ़िया कोलंबिया यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर थे।

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