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राजस्थान के कुख़्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह ने अपने जीवन में कई लोगों को मौत के घाट उतारा। महज़ अपनी धौंस और डर बढ़ाने के लिए आनंदपाल ने क़ानून को खिलौने की तरह इस्तेमाल किया। वसूली और फिरौती के लिए आनंदपाल ने अपने द्वारा किये गए हत्याकांड को बड़ी बेरहमी और बर्बरता से अंजाम दिया। इसकी सजा उसे मिली कि मरने के बाद भी इस पापी की मृत देह 20 दिनों तक अंत्येष्टि के लिए तड़पती रही। कई बच्चों को अनाथ और औरतों को बेसहारा बनाने वाले आनंदपाल को इन बेबस लोगों की ऐसी हाय लगी, कि जीतें जी बदनाम रहा आनंदपाल मरने के बाद भी वीरभूमि राजस्थान के लिए कलंक बन गया।

हैवानियत और बर्बरता से मारता था लोगों को:

आनंदपाल ने अपने जीवन में जितने भी मर्डर किये उन सभी लोगों को बड़ी हैवानियत से मारा। फिरौती के लिए जिन लोगों को आनंदपाल पकड़कर लाता था, उन्हें अपने टॉर्चर रूम में क़ैदकर तड़पा-तड़पा कर मार देता था। अपहरण के लिए पकड़कर लाये गए लोगों को आनंदपाल अपने लाडनूं स्थित फार्म हाउस या जिसे हम टॉर्चर जेल भी कह सकते है, ऐसी अँधेरी कोठरी में बंद कर देता था। उसके बाद सुबह – शाम आनंदपाल अपनी पूरी गैंग के सदस्यों के साथ शिकार व्यक्ति को बारी-बारी से पीटता था। हैवानियत की सीमाओं से परे जाकर आनंदपाल ने भोले-भालें लोगों को मौत के घाट उतारा है।

शरीर की बोटी-बोटी को एसिड में गला देता था:

आनंदपाल सिंह द्वारा अपने शिकार को मारने का तरीका इतना भयावय था कि उसे सुनकर ही लोगों के मन में सिहरन दौड़ जाती है। पुलिस पूछताछ में आनंदपाल के भाई विक्की और गट्टू ने बताया कि वसूली के लिए लाये गए नानूराम के साथ बहुत ही बद्तर सलूक किया गया। नानूराम को पंखे से उल्टा  लटकाकर, जमकर पीटा। पीट-पीट कर अधमरा कर देने के बाद नानूराम की गर्दन काट दी गयी। विक्की और गट्टू ने सभी आरोपों को कबूल करते हुए बताया कि एक वार में जब नानूराम की गर्दन नहीं कटी तो उसके शरीर के मांस की एक-एक बोटी काटी गयी। इसके बाद उसके शरीर के टुकड़ों को ख़ौलतें एसिड में डाल दिया गया। उसका पूरा मांस उस एसिड में गल गया। लेकिन उसके दांत और हड्ड़ियां बच गए थे। फिर उसकी हड्डियों और दांत को पीसकर हवा में उड़ा दिया गया। नानूराम के गले हुए खून और मांस से भरे हुए एसिड को गाड़ी में रखकर इन लोगों ने सड़कों पर बिखेर दिया था। इतनी बर्बरता से नानूराम को मारा गया। आनंदपाल के भाइयों ने बताया कि इसी तरह सांडवा केस हत्याकांड में गुमानाराम को मारा। उसके शरीर की सारी हड्ड़ियां तोड़कर उसे ख़त्म कर दिया था।

कभी सरेंडर करना नहीं चाहता था:

राजस्थान का बदनाम गैंगस्टर आनंदपाल जब फरार हुआ था तो उसके बाद से ही उसने यह बात ठान ली थी, कि ‘अब सरेंडर नहीं करना है।’ पुलिस की गिरफ़्त में आये आनंदपाल भाई विक्की और गट्टू ने पुलिस को बताया कि आनंदपाल कभी सरेंडर करना ही नहीं चाहता था। वह हमेशा कहता था कि मुझे  अब मरते दम तक पुलिस की पकड़ में नहीं आना है। आनंदपाल कहता था कि यदि पुलिस पकड़ने की कोशिश करेगी तो हम पुलिस को मुहतोड़ जवाब देंगे। आनंदपाल ने इसके लिए अपने सभी साथियों को बन्दूक और चाक़ू जैसे हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी दी थी। उसी ट्रेनिंग के आधार पर आनंदपाल और उसके साथियों ने कई बार पुलिस पर फायर भी किए थे। आनंदपाल अपने साथियों से कहता रहता था कि उसकी गैंग बहुत मजबूत है। पुलिस से डरने की ज़रुरत नहीं है। पुलिस की हर कार्यवाही पर हम उन्हें सबक सिखाएंगे।

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