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इन दिनों टीवी चैनलों पर उत्तर प्रदेश के सीएम अखिलेश यादव की उपलब्धियों का एक विज्ञापन प्रसारित हो रहा है। कोई एक मिनट के इस विज्ञापन में लखनऊएक्सप्रेस हाइवे के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है और यह बताने का प्रयास किया गया है कि यूपी में जो भी विकास हुआ है, उसका श्रेय अखिलेश यादव को ही है। इस पूरे विज्ञापन में पिता मुलायम सिंह यादव और चाचा शिवपाल यादव का कोई उल्लेख नहीं है। इससे प्रतीत होता है कि अखिलेश आगामी विधानसभा का चुनाव अपने दम पर ही लड़ेगें। जो समाजवादी पार्टी सिर्फ मुलायम के नाम से जानी जाती थी, उस पार्टी से अब मुलायम का नामोनिशान मिटाया जा रहा है। जानकारों की मानें तो अखिलेश यादव अपनी सरकार की छवि पर पिता के कुनबे के छीटें पडऩे नहीं देना चाहते हैं।

अखिलेश को लगता है कि यदि सरकार की उपलब्धियों के विज्ञापनों में मुलायम का फोटो अथवा नाम दिखाया गया तो उनकी छवि खराब हो जाएगी। लखनऊ एक्सप्रेस हाइवे वाले विज्ञापन की एक खास बात यह भी है कि इस विज्ञापन को यूपी सरकार के जनसम्पर्क विभाग ने जारी नहीं किया है। संभवत: यह विज्ञापन एक्सप्रेस हाइवे की कम्पनी की ओर से जारी हुआ है। इससे यह भी अंदाजा लगता है कि लोकसभा चुनाव में अपने प्रचार के लिए नरेन्द्र मोदी ने जो तौर-तरीके अपनाए थे, वैसे ही तरीके अखिलेश अपना रहे हैं। 26 दिसंबर को न्यूज चैनलों पर यह बात भी सामने आई कि उम्मीदवारों को लेकर पिता-पुत्र में एक बार फिर विवाद उठ खड़ा है। चाचा शिवपाल को यह समझना चाहिए कि जब अखिलेश अपने विज्ञापन से पिता का ही नाम और फोटो हटा सकते हैं तो फिर कांग्रेस के साथ मिलकर अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी कर सकते हैं।

(एस.पी.मित्तल)

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