आखिर क्यों राजस्थान यूनिवर्सिटी में पढ़े विद्यार्थीयो को जॉब के लिए तरसना पड़ रहा है ?

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गौरतलब है कि विश्वविद्यालय में रोजगार देने के लिए कई वर्षों पहले प्रोफेशनल कोर्स शुरू किए गए थे, लेकिन पांच सालों में ही बड़ी संख्या में इन पाठ्यक्रमों को बंद कर दिया गया है, उसके बाद से ही विश्वविद्यालय से लगातार प्रोफेशनल कोर्स गायब होते जा रहे हैं. वहीं जो कोर्स शेष बचे हैं, उनमें भी छात्रों की संख्या न के बराबर है.

राजस्थान के राजस्थान विश्वविद्यालय में प्रोफेशनल कोर्सेज के बंद होने से यहां से शिक्षा ले रहे विद्यार्थी रोजगार को तरस रहे हैं. क्योकि विश्वविद्यालय में प्रोफेशनल कोर्स को बंद कर दिया गया है, जिससे यहां बरसों पुराने नियमित पाठ्यक्रम ही पढ़ाए जा रहे हैं.

बता दें कि प्रदेश के करीब 1 लाख 50 हजार से ज्यादा विद्यार्थी प्रोफेशनल कोर्स की पढ़ाई का लाभ उठा रहे थे. ऐसे में अचानक व्यावसायिक कोर्स बंद होने से रोजगारोन्मुख शिक्षा को तो धक्का लगा ही है. साथ ही प्रदेश के 1,810 शिक्षकों के सामने रोजगार का भी संकट खड़ा हो गया है. कुछ प्रोफेशनल कोर्स में छात्रों की कमी कॉमर्स संकाय में चल रहे कुछ प्रोफेशनल कोर्स छात्र-छात्राओं की कमी से जूझ रहे हैं. वहीं कुछ प्रोफेशनल कोर्सेज भी शिक्षकों की कमी के कारण बंद हो गए.

रोजगार में भी शून्य राजस्थान विश्वविद्यालय में चल रहे नियमित कोर्स (बीए, एमए, बीकॉम, एमकॉम, बीएससी) आदि से छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार नहीं मिलता. वहीं विश्वविद्यालय में रोजगार केंद्र होने के बाद भी दो सालों में रोजगार का आंकड़ा शून्य के आसपास ही रहा है, जिससे छात्रों को रोजगार मिलने में कमी आई हैं.

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