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राजस्थान की जल क्रांति अब देश भर की जन क्रांति के रूप में प्रखर हो चुकी है। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के पहले चरण में शामिल 66 शहरों में मिले सार्थक परिणामों के बाद अब राज्य सरकार ने बाकि बचे करीब 124 शहरों को भी मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान में शामिल कर दिया जाएगा। इन शहरों के लिए कार्य योजना तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर जून 2018 तक पूरे कर लिए जाएंगे। इस संबंध में सूबे के मुख्य सचिव अशोक जैन ने इस संबंध में अधिकारियों को दिशा निर्देश जारी किए है। पहले चरण में शामिल 66 शहरों में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत किये जाने वाले कार्य सफलता पूर्वक पूर्ण कर लिए गए है।

124 शहरों को किया गया शामिल, इन कार्यों पर दिया जाएगा ध्यान

मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान यानी जल क्रांति के दूसरे अभियान के दौरान प्रदेश के चुंनिंदा 124 शहरों के राजकीय भवनों  पर एक रूफ टॉप वार्ट हार्वेस्टिंग संरचना का निर्माण किया जाएगा। साथ ही प्राचीन बावड़ियों का जीर्णोद्धार, शहरी क्षेत्रों में सघन पौधारोपण एवं जल भराव वाले क्षेत्रों को चिन्हीकरण कर समाधान करने के लिए सर्वेक्षण एवं कार्य योजना तैयार की जाएगी। इस योजना के तहत सभी पुराने कुओं एवं बावड़ियों की मरम्मत के पश्चात क्रियाशील बनाए रखने के लिए निर्मिंत तंत्र की उचित मरम्मत एवं रख रखाव के लिए उपयोगिता योजना तैयार कर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना तथा निजी भवन मालिकों को रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं के निर्माण और परलोकेशन निर्माण के लिए प्रेरित किया जाए। मुख्य सचिव जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत शामिल किए जाने वाले शेष शहरों की कार्य अवधि जून 2018 तक रहेगी।

मरम्मत और उपयोगिता का क्रियाशील होना अनिवार्य

मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत शामिल शहरों की डीपीआर के साथ उपयोगिता योजना आवश्यक रूप के प्रस्तुत करनी होगी इसके साथ ही अंतिम उपयोगकर्ता का चिन्हिकरण करना आवश्यक होगा। संरचना का रख रखाव सुनिश्चित करने एवं इसे क्रियाशील बनाए रखना, अंतिम उपयोगकर्ता का चिन्हिकरण का प्रमुख आधार होगा। सभी पुराने कुओं, बावड़ियों को मरम्मत पश्चात क्रियाशील बनाए रखने के लिए उपयोगिता योजना तैयार कि जाएगा। इस शहरों में स्थित सभी बावड़ियों को योजना में शामिल किया जाएगा। किसी बावड़ी विशेष में कोई कार्य किया जाना इस योजना में प्रस्तावित नही है तो इस संबंध में डीपीआर में अंकित करना होगा। साथ ही किसी बावड़ी की स्थिति सुधार किया जाना संभव नही है तो इस संबंध में भी डीपीआर में दर्शाना अनिवार्य होगा।

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